सुकमा की कला का लोहा: 84 टीमों को पछाड़ जीता खिताब
तीन दिनों तक चले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में बस्तर संभाग के सात जिलों की 84 टीमों और करीब 700 से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। 12 विभिन्न श्रेणियों में आयोजित प्रतियोगिताओं के बीच जनजातीय नाट्य विधा में सुकमा के दल ने अपनी मौलिकता और प्रभावशाली अभिनय से सबका दिल जीत लिया। समापन समारोह में सुकमा के कलाकारों की जीत की घोषणा होते ही पूरा लाल बाग मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
अमित शाह का संदेश: ’31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त होगा बस्तर’
पुरस्कार वितरण के दौरान अपने संबोधन में गृह मंत्री अमित शाह ने कलाकारों की सराहना करते हुए बस्तर के विकास और शांति पर जोर दिया। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया करना है। शाह ने कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजन न केवल कला का संरक्षण करते हैं, बल्कि शांति की दिशा में एक नया मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी घोषणा की कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ‘बस्तर पंडुम’ को आने वाले वर्षों में और भव्य रूप देगी।
Voices from the Ground / Official Statements
“यह जीत हमारे पूर्वजों की विरासत और सुकमा की माटी की जीत है। गृह मंत्री जी के हाथों पुरस्कार मिलना हमारे दल के लिए गौरव की बात है। हमने इस प्रस्तुति के लिए कई महीनों तक तैयारी की थी।” — सुकमा जनजातीय नाट्य दल के सदस्य
“बस्तर पंडुम 2026 केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक घोषणा है कि बस्तर की धड़कन अब ढोल की थाप पर लौट आई है। सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों से आए कलाकारों का उत्साह बदलाव की सबसे बड़ी गवाही है।” — केदार कश्यप, प्रभारी मंत्री, बस्तर जिला



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