- बड़ा मूव: पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपनी पैरवी खुद करते हुए निष्पक्षता के आधार पर जस्टिस स्वर्ण कांता को केस से अलग करने की मांग की।
- सीबीआई की चुनौती: यह सुनवाई सीबीआई की उस याचिका पर हो रही है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा 24 आरोपियों को दी गई राहत को चुनौती दी गई है।
- हाई-स्टेक्स गेम: केस में मनीष सिसोदिया समेत कुल 22 अन्य दिग्गज खिलाड़ी भी रडार पर हैं।
Arvind KejriwalArvind Kejriwal , नई दिल्ली — दिल्ली के सियासी मैदान में ‘कानूनी वर्ल्ड सीरीज’ का सबसे रोमांचक मुकाबला आज हाईकोर्ट में देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसी पेशेवर वकील को आगे करने के बजाय खुद क्रीज पर उतरकर अपनी पैरवी की। मामला सीबीआई की उस अपील से जुड़ा है जिसने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली थी।
कोर्ट रूम का ‘पावर प्ले’: निष्पक्षता पर उठाए सवाल
केजरीवाल ने आज कोर्ट में बेहद आक्रामक ‘अटैकिंग मोड’ में बैटिंग की। उन्होंने सीधे तौर पर बेंच के गठन और निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं।
- जस्टिस पर सवाल: केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को इस केस की सुनवाई से हटने का आग्रह किया। उन्होंने दलील दी कि पिछले कुछ आदेशों को देखते हुए उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद कम लग रही है।
- 22 आरोपियों का डिफेंस: ट्रायल कोर्ट ने पहले ही केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य 22 आरोपियों को कुछ खास कानूनी राहत दी थी, जिसे सीबीआई अब ‘रिव्यू’ कराना चाहती है।
- सेल्फ-डिफेंस: केजरीवाल ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए सीबीआई की ‘लाइन और लेंथ’ को चुनौती दी।
सीबीआई की टीम ने केजरीवाल की इस मांग का कड़ा विरोध किया है। एजेंसी का मानना है कि यह केवल समय बर्बाद करने और सुनवाई को टालने की एक रणनीतिक चाल है।
“न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। मुझे इस बेंच से निष्पक्षता को लेकर गंभीर संशय है, इसलिए मैं अनुरोध करता हूँ कि इस मामले को किसी अन्य बेंच को भेजा जाए।”
— अरविंद केजरीवाल, पूर्व सीएम (हाईकोर्ट में दलील के दौरान)

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