अदालत की सख्त टिप्पणी: “सिर्फ दावों से केस नहीं चलता”
अदालत ने अपने 81 पन्नों के विस्तृत आदेश में जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि हजारों पन्नों की चार्जशीट दाखिल करने के बावजूद, ऐसा कोई ठोस दस्तावेज या गवाह नहीं मिला जो यह साबित कर सके कि नीति में बदलाव किसी ‘साउथ लॉबी’ को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों पर बिना पर्याप्त आधार के आरोप लगाना न केवल कानूनन गलत है, बल्कि यह सार्वजनिक संस्थानों में जनता के भरोसे को भी कमजोर करता है। अदालत ने मामले के सभी 23 आरोपियों (जिनमें के. कविता भी शामिल हैं) को तत्काल प्रभाव से दोषमुक्त कर दिया है।
“आज सत्य की जीत हुई है। हमारे खिलाफ राजनीतिक साजिश रची गई थी। कोर्ट के इस फैसले ने साबित कर दिया कि हम ‘कट्टर ईमानदार’ हैं। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था।”
— अरविंद केजरीवाल, राष्ट्रीय संयोजक, आम आदमी पार्टी
“सत्यमेव जयते। बाबा साहब के संविधान और देश की अदालतों ने आज इंसाफ किया है। मोदी जी की एजेंसियों ने हमें जेल में डालकर खत्म करने की कोशिश की, लेकिन सच सामने आ ही गया।”
— मनीष सिसोदिया, पूर्व उपमुख्यमंत्री, दिल्ली
इस फैसले का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल्ली के आगामी प्रशासनिक परिदृश्य को भी बदलेगा:
- राजनीतिक दबदबा: दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस फैसले ने AAP के ‘ईमानदारी’ वाले नैरेटिव को नई ताकत दी है।
- ED का मामला: हालांकि यह फैसला सीबीआई केस में आया है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर ईडी (Enforcement Directorate) के मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर भी पड़ेगा, क्योंकि प्रेडिकेट ऑफेंस (आधार अपराध) ही कमजोर साबित हुआ है।
- प्रशासनिक स्पष्टता: लंबे समय से अटके कई नीतिगत फैसलों में अब तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर लगा कानूनी ग्रहण हट गया है।

More Stories
Ruckus In JNU : छात्रों के ‘लॉन्ग मार्च’ में हिंसा, पुलिस पर पत्थर और जूते फेंके; कई पुलिसकर्मी घायल
Supreme Court Election Spend PIL : चुनाव में ‘धनबल’ पर वार: SC ने पूछा- क्यों न तय हो राजनीतिक पार्टियों के खर्च की अधिकतम सीमा
Anil Ambani : अनिल अंबानी पहुंचे ED ऑफिस’ ₹40,000 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में दूसरे दौर की पूछताछ, कल ही जब्त हुआ था ₹3,716 करोड़ का बंगला