AI Physiotherapy Treatment , नई दिल्ली — अब फिजियोथेरेपी के लिए अस्पताल के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई AI आधारित फिजियोथेरेपी तकनीक मरीजों को घर बैठे एक्सरसाइज कराने और उनकी प्रगति पर नजर रखने का काम करेगी। यह सिस्टम खास तौर पर खेल चोट, घुटने-दर्द और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं में मददगार माना जा रहा है।
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AI फिजियोथेरेपी कैसे काम करती है
यह तकनीक स्मार्टफोन या लैपटॉप के कैमरे और AI सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती है। मरीज जैसे ही एक्सरसाइज शुरू करता है, सिस्टम शरीर की हर मूवमेंट को रिकॉर्ड करता है। गलत पोजिशन दिखते ही स्क्रीन पर तुरंत सुधार के निर्देश आ जाते हैं। AI हर सेशन का डेटा सेव करता है। इससे डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट दूर बैठकर भी मरीज की रिकवरी देख सकते हैं। अगर प्रगति धीमी होती है, तो एक्सरसाइज प्लान तुरंत बदला जा सकता है।
खिलाड़ियों के लिए क्यों अहम
स्पोर्ट्स इंजरी के बाद फिजियोथेरेपी सबसे अहम हिस्सा होती है। AI आधारित सिस्टम खिलाड़ियों को रोजाना ट्रेनिंग की तरह रूटीन फॉलो करने में मदद करता है। कोई एक्सरसाइज मिस नहीं होती। कोई मूवमेंट गलत नहीं जाता। NFL समेत कई प्रोफेशनल लीग्स में पहले से ही ऐसी तकनीक का टेस्ट चल रहा है, ताकि खिलाड़ी तेजी से और सुरक्षित तरीके से मैदान पर लौट सकें।
एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं
“AI फिजियोथेरेपी मरीजों की आदत और अनुशासन दोनों सुधारती है। घर पर सही गाइडेंस मिलना रिकवरी की रफ्तार बढ़ा सकता है।”
— स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट
इसका क्या मतलब निकलता है
AI आधारित फिजियोथेरेपी हेल्थकेयर को ज्यादा सुलभ बना रही है। जिन इलाकों में फिजियोथेरेपिस्ट उपलब्ध नहीं हैं, वहां यह तकनीक गेम बदल सकती है। आने वाले समय में यह सिस्टम सिर्फ सपोर्ट टूल नहीं, बल्कि फिजियोथेरेपी का मुख्य तरीका बन सकता है—खासकर खिलाड़ियों, बुजुर्गों और सर्जरी के बाद रिकवरी कर रहे मरीजों के लिए।



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