BJP vs AAP , नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (MCD) उपचुनाव 2025 के नतीजे बुधवार को घोषित कर दिए गए। राजधानी की 12 वार्ड सीटों पर हुए इन उपचुनावों में इस बार राजनीतिक समीकरणों में दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है। भाजपा ने सबसे अधिक 7 सीटों पर कब्जा जमाते हुए अपना दबदबा बनाए रखा, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) को केवल 3 सीटों से संतोष करना पड़ा। कांग्रेस ने भी इस चुनाव में एक सीट जीतकर अपना खाता खोला। इसके अलावा ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक ने भी एक सीट पर जीत हासिल कर सबको चौंका दिया।
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30 नवंबर को हुए मतदान में इस बार 38.51% वोटिंग दर्ज की गई थी। चुनावी नतीजों में कई जगह कांटे की टक्कर देखने को मिली, जबकि कुछ वार्डों में बड़े अंतर से जीत मिली।
किसके खाते में कितनी सीटें?
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भारतीय जनता पार्टी (BJP): 7 सीटें
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आम आदमी पार्टी (AAP): 3 सीटें
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कांग्रेस: 1 सीट
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ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक: 1 सीट
BJP का प्रदर्शन
दिल्ली एमसीडी में अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए भाजपा ने इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाया था। पार्टी ने अधिकांश वार्डों में बढ़त बनाए रखी और 7 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा का मानना है कि ये नतीजे जनता के भरोसे और उनके कामकाज की पुष्टि हैं।
AAP को बड़ा झटका
दिल्ली में शासन कर रही आम आदमी पार्टी को इस बार अपेक्षित सफलता नहीं मिली। AAP ने केवल 3 वार्ड जीते। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता की उम्मीदों पर फिर से खरा उतरने के लिए वे आगामी रणनीति पर काम करेंगे।
कांग्रेस ने खोला खाता
काफी समय से दिल्ली की राजनीति में संघर्ष कर रही कांग्रेस ने एक सीट जीतकर अपना मनोबल बढ़ाया है। पार्टी का कहना है कि वह भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए संगठन को मजबूत बनाएगी।
ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक का सरप्राइज
इन उपचुनावों में एक सीट पर ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक की अप्रत्याशित जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। स्थानीय मुद्दों और वॉर्ड लेवल कैंपेनिंग को उनकी जीत का मुख्य कारण माना जा रहा है।
38.51% मतदान—उपस्थिति कम पर मुकाबला कड़ा
मतदान प्रतिशत कम होने के बावजूद कई वार्डों में बेहद नजदीकी मुकाबले देखने को मिले। कम वोटिंग के बावजूद चुनावी माहौल पूरे दिन गर्म रहा।
राजधानी में क्या बदलेगा?
इन नतीजों के साथ दिल्ली में एमसीडी की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। हालांकि उपचुनाव के परिणाम पूरे निगम के गठन में बड़ा बदलाव नहीं लाते, लेकिन आने वाले समय में राजनीतिक दलों की रणनीतियों और संगठनात्मक गतिविधियों पर उसका असर जरूर दिखेगा।



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