छत्तीसगढ़ के रायपुर में जिला शिक्षा अधिकारी ने निजी स्कूलों के लिए गाइड लाइन जारी की है. वहीं निजी स्कूल अब प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें नहीं पढ़ाएंगे. जारी गाइड लाइन के मुताबिक, रायपुर के निजी स्कूल के पास जिस बोर्ड की मान्यता है उसी बोर्ड की किताबें पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है.
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स्टेट बोर्ड के लिए SCERT और सीबीएसई की किताबें अनिवार्य कर दी गई है, जबकि आईसीएसई बोर्ड के लिए एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य की गई है.
आदेश के मुताबिक, अब सीबीएसई (CBSE) से मान्यता प्राप्त स्कूलों को केवल एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों से ही पढ़ाई करानी होगी, जबकि छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों को पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा निर्धारित SCERT और सीबीएसई की किताबें पढ़ानी होंगी. बता दें कि 25 जून के आदेश में 8 बिन्दुओं के निर्देश जारी किए गए हैं. वहीं इस आदेश का उल्लंघन करने यानी आदेश का पालान नहीं करने पर शिक्षा के अधिकार 2009 के तहत कार्रवाई की जाएगी.
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जूते-मोजे, टाई-बेल्ट की बिक्री पर रोक
आदेश में ये भी कहा गया है कि निजी स्कूल यूनिफॉर्म से जुड़े किसी भी वस्तु जैसे जूते, मोजे, बैग, टाई, बेल्ट, नोटबुक आदि की बिक्री परिसर में नहीं कर सकेंगे और न ही किसी खास दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जाएगा.

बता दें कि शिक्षा अधिकारी के इस आदेश पर अब सवाल खड़े हो गए हैं. दरअसल, 16 जून से सेशन शुरू हो चुका है और स्कूल के सेशन की शुरू होने के दस दिन बाद यह आदेश जारी किया गया है, जबकि सभी निजी स्कूल के छात्र किताबें कॉपी यूनिफार्म खरीद चुके हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इस आदेश का लाभ किसे मिलेगा? क्या शिक्षा अधिकारी अपने आदेश का पालन करा पाएंगे? या सिर्फ औपचारिकता के लिए जारी किया गया आदेश?

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