खैरागढ़ – राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ अंतर्गत साल्हेवारा क्षेत्र से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां बिजली विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी के साथ ठेकेदार और उसके साथियों ने सरेआम मारपीट की। यह पूरी घटना वहां मौजूद लोगों ने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर ली, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। घटना के बाद इलाके में तनाव और कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखा गया। घटना 19 जून 2025 की शाम करीब 6:30 बजे की बताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित (CSPDCL) में लाइन परिचालक (लाइन श्रेणी-3) के पद पर पदस्थ हरीश राजपूत अपनी ड्यूटी समाप्त कर कंट्रोल रूम के सामने बैठे हुए थे। तभी विभाग में कार्यरत एक ठेकेदार कर्मवीर सिंह बघेल, उसका साथी पुष्पराज सिंह और ड्राइवर राहुल मानिकपुरी वहां पहुंचे और बिना किसी पूर्व विवाद के बहस करने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ठेकेदार कर्मवीर सिंह ने हरीश पर आरोप लगाया कि, “यह मेरी गाड़ी को बार-बार नुकसान पहुंचाता है,” और गुस्से में आकर पहले थप्पड़ मारा, फिर अन्य साथियों के साथ मिलकर लात-घूंसे से बुरी तरह पीटा। घटना के दौरान आरोपी लगातार गाली-गलौज करते रहे और जान से मारने की धमकी भी दी।
घटना की गंभीरता को बढ़ाते हुए, वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों और आम नागरिकों ने इस पूरी घटना को मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिससे पूरे इलाके में गंभीर आक्रोश फैल गया है। कर्मचारियों और आम नागरिकों ने इस तरह की हिंसा की कड़ी निंदा की है। पीड़ित कर्मचारी हरीश राजपूत ने इस संबंध में साल्हेवारा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 294 (गाली-गलौज), 506 (धमकी), 323 (मारपीट), 34 (साझा आपराधिक कृत्य) एवं अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया है।
थाना प्रभारी ने बताया कि वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं प्रशासन द्वारा कदापि बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। घटना के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों और उनके संगठनों में भारी आक्रोश है। छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ, तकनीकी कर्मचारी संगठन सहित कई यूनियनों ने इस घटना की निंदा करते हुए त्वरित गिरफ्तारी और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो वे कार्य बहिष्कार या आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
“प्रशासन और जनता के बीच का सेतु”
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