रायपुर, 7 जून 2025: छत्तीसगढ़ में आधार सेवाओं से जुड़े ऑपरेटर्स पर एक बड़ा संकट आ गया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) और छत्तीसगढ़ सूचना प्रौद्योगिकी प्रसार संस्था (चिप्स) ने प्रदेश के कुल 1,346 आधार केंद्र संचालकों पर लगभग ढाई करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। इस अप्रत्याशित कार्यवाही से प्रदेशभर के आधार संचालकों में भारी नाराजगी फैल गई है, जिसके चलते वे अब आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। उनकी चेतावनी है कि यदि यह जुर्माना वापस नहीं लिया गया और दोषियों की पहचान नहीं हुई, तो वे आधार सेवाओं को बंद कर सकते हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान प्रदेशभर के आधार केंद्रों में 24 हजार से अधिक आधार पंजीयन या संशोधन के आवेदन बिना किसी उचित कारण के खारिज कर दिए गए थे। ऑपरेटर्स का कहना है कि इससे न केवल आवेदकों को परेशानी हुई, बल्कि उन्हें भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यूआईडीएआई और चिप्स द्वारा लगाए गए इस जुर्माने के पीछे मुख्य कारण बिना कारण आवेदन खारिज करना, दस्तावेजों में त्रुटि होना और फोटो मिलान में अंतर जैसे मुद्दे बताए गए हैं।
ऑपरेटर्स का आरोप है कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण बताए यह सजा दी जा रही है और न ही उन्हें अपनी बात रखने का कोई सुनवाई का अवसर दिया गया है। वर्षों से निःस्वार्थ भाव से आधार सेवाएँ दे रहे इन कर्मियों पर लाखों रुपये का जुर्माना थोप दिया गया है। यूआईडीएन के नियमों के अनुसार, विभिन्न कारणों से ऑपरेटरों पर दो लाख रुपये से अधिक की पेनल्टी लगाई गई है। लगभग 707 ऑपरेटरों पर दो लाख, 269 पर एक से दो लाख और शेष पर 50 हजार से अधिक की पेनल्टी लगाई गई है।
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नाराज आधार केंद्र संचालकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि यह जुर्माना वापस नहीं लिया गया और इस मुद्दे पर ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो वे अपनी आधार सेवाओं को बंद कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश में आम नागरिकों को नए आधार बनवाने या मौजूदा आधार में किसी भी प्रकार का अपडेट करवाने जैसी आवश्यक सेवाओं में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, चिप्स अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले ऑपरेटर्स को पहले भी कई बार चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद जब गड़बड़ियाँ जारी रहीं, तभी यह कठोर कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के अनुसार, आधार डेटा की शुद्धता बनाए रखना ऑपरेटर्स की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गतिरोध कब और कैसे समाप्त होता है, और क्या ऑपरेटर्स वास्तव में अपनी सेवाओं को बंद करने के लिए मजबूर होते हैं।
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