वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत भारत के लिए आर्थिक रूप से शुभ संकेत लेकर आई है। मई 2025 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा, जो मई 2024 की तुलना में 16.4% अधिक है। इससे पहले अप्रैल में रिकॉर्ड 2.37 लाख करोड़ रुपये का संग्रह हुआ था। यह लगातार दूसरा महीना है जब जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ के पार पहुंचा है, जिससे स्पष्ट है कि देश की खपत क्षमता और औद्योगिक गतिविधियाँ गति पकड़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू बिक्री से प्राप्त जीएसटी में 10% और आयात से मिलने वाले कर में 73% की वृद्धि इस बात का संकेत है कि आर्थिक गतिविधियाँ व्यापक स्तर पर बढ़ी हैं। अप्रैल और मई का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि सरकार द्वारा लिए गए राजकोषीय निर्णय और कर प्रशासन में पारदर्शिता अर्थव्यवस्था को स्थायित्व देने में सफल हो रही है।
छत्तीसगढ़ ने जीएसटी संग्रह में 18% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। महाराष्ट्र (16%) और तमिलनाडु (15%) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। छत्तीसगढ़ में अब तक 16,390 करोड़ रुपये का राज्य जीएसटी संग्रह हुआ है और केंद्र सरकार से 1,301 करोड़ रुपये का मुआवजा भी प्राप्त हुआ है, जो राज्यों के बीच उसके मजबूत आर्थिक प्रबंधन को दर्शाता है।
इस दौरान केंद्र सरकार ने मई में 27,210 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड भी जारी किया, जिससे व्यापारियों की तरलता सुनिश्चित हुई। यह स्पष्ट है कि जीएसटी संग्रह में आई तेजी से न केवल सरकार की आय बढ़ी है, बल्कि राज्यों को भी राजस्व के नए स्रोत मिले हैं जो विकास योजनाओं में मददगार सिद्ध होंगे।

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