रायपुर, छत्तीसगढ़: राजधानी रायपुर के बाहरी इलाके में नालियों से निकाली गई प्लास्टिक की बोतलों का यह वीभत्स ढेर, सड़ी हुई गंदगी और कालिख से सना, समाज को एक कड़वा सच दिखा रहा है। यह सिर्फ कचरे का ढेर नहीं, बल्कि हमारी उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार का जीता-जागता प्रमाण है। ये वो “जिद्दी” प्लास्टिक है, जो सदियों तक न तो सड़ती है और न ही समाप्त होती है, बस अपना जहरीला निशान छोड़ती जाती है।
जैसा कि चित्र में दिख रहा है, ये बोतलें नाले से निकाली गई हैं, जो अब काली पड़ चुकी हैं और चारों ओर सड़ी हुई गंदगी फैली है। यह सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के सामने खड़ी उस भयानक चुनौती का प्रतीक है, जिसे हम लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।
हमारा समाज, हमारा कचरा: यह केवल प्लास्टिक नहीं, हमारी जीवनशैली का प्रतिबिंब है
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमने सुविधा के नाम पर प्लास्टिक को इतना अपना लिया है कि अब हम उसके बिना रह नहीं सकते। लेकिन इस सुविधा की कीमत हम और हमारा पर्यावरण चुका रहा है। नालियों में प्लास्टिक की बोतलों का जमा होना, जल निकासी को बाधित करना, मच्छर और बीमारियां फैलाना – यह सब उस श्रृंखला का हिस्सा है जिसे हमने खुद बनाया है।
* जलभराव और बीमारियां: नालियों में जमा प्लास्टिक शहरी क्षेत्रों में जलभराव का एक प्रमुख कारण बनता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। ठहरे हुए पानी में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसे बीमारियों के वाहक मच्छर पनपते हैं, जिससे जनस्वास्थ्य को सीधा खतरा होता है।
* मिट्टी और जल प्रदूषण: ये प्लास्टिक और इससे चिपकी गंदगी धीरे-धीरे मिट्टी और भूजल में रिसती है, जिससे हमारी खाद्य श्रृंखला भी दूषित होती है। कृषि भूमि और पेयजल स्रोत भी इसके दुष्प्रभाव से अछूते नहीं रहते।
* पर्यावरण का दम घुटना: प्लास्टिक के इस बेतरतीब निपटान से हमारी नदियों, तालाबों और अंततः समुद्रों का दम घुट रहा है। जीव-जंतु इसे भोजन समझकर खा लेते हैं या इसमें फंसकर अपनी जान गंवा देते हैं।
* सांस लेती हवा में जहर: जब यही प्लास्टिक कचरा जलाया जाता है (जैसा कि चित्र में दिख रही कालिख से प्रतीत होता है), तो यह डाइऑक्सिन और फ्यूरान जैसे अत्यधिक जहरीले रसायन छोड़ता है, जो वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
अब समय आ गया है: हम जिम्मेदारी लें और बदलाव लाएं!
यह तस्वीर समाज को एक स्पष्ट और तत्काल संदेश देती है:
* अपनी जिम्मेदारी समझें: यह “मेरा कचरा नहीं” कहकर पल्ला झाड़ने का समय नहीं है। हम सभी अपनी दैनिक गतिविधियों में प्लास्टिक का उपयोग करते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि हम उसका सही निपटान करें।
* कम करें, दोबारा उपयोग करें, पुनर्चक्रण करें (Reduce, Reuse, Recycle): यह मंत्र सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे जीवन का हिस्सा बने।
* कम करें: अनावश्यक प्लास्टिक उत्पादों, विशेषकर सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (जैसे प्लास्टिक की बोतलें, थैलियां) का उपयोग कम करें। पानी की बोतलें घर से लाएं, कपड़े के थैले का उपयोग करें।
* दोबारा उपयोग करें: प्लास्टिक की चीजों को फेंकने से पहले देखें कि क्या उनका दोबारा उपयोग किया जा सकता है।
* पुनर्चक्रण करें: अपने घरों में कचरे को अलग-अलग करना शुरू करें – गीला, सूखा और प्लास्टिक। प्लास्टिक को पुनर्चक्रण के लिए अलग से इकट्ठा करें।
* जागरूकता फैलाएं: अपने पड़ोसियों, दोस्तों और परिवार को प्लास्टिक प्रदूषण के खतरों और सही निपटान के बारे में शिक्षित करें।
* प्रशासन का सहयोग करें: स्थानीय नगर निगम या ग्राम पंचायत द्वारा चलाए जा रहे कचरा संग्रह और पुनर्चक्रण कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लें। यदि आपके क्षेत्र में ऐसी सुविधाएं नहीं हैं, तो इसके लिए आवाज़ उठाएं।
* प्लास्टिक जलाने से बचें: किसी भी परिस्थिति में प्लास्टिक कचरे को खुले में न जलाएं। यह पर्यावरण और आपके स्वास्थ्य दोनों के लिए अत्यंत हानिकारक है।
यह समझना होगा कि पर्यावरण को हो रहा नुकसान अंततः हमारे अपने जीवन को प्रभावित करेगा। रायपुर में मिली ये गंदी, कालिख पुती प्लास्टिक की बोतलें एक चेतावनी हैं। यदि हमने अब भी जिम्मेदारी नहीं ली, तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को सांस लेने के लिए साफ हवा और पीने के लिए साफ पानी भी नहीं मिलेगा। यह समय है कि हम जागें, अपनी आदतें बदलें, और एक स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं।



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