रायपुर। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर यह बात एक बार फिर सामने आई है कि होम्योपैथी उपचार धीमा जरूर होता है, लेकिन बीमारियों की जड़ तक पहुंचकर उन्हें खत्म करता है। रायपुर स्थित नवोदय विद्यालय में हर साल बच्चों को चिकन पॉक्स (छोटी माता) की शिकायत होती थी, लेकिन पिछले पांच वर्षों से यह समस्या पूरी तरह खत्म हो गई है।
प्रदेश के एकमात्र होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य डॉ. दिलीप मुकुंद पिंपले ने बताया कि छात्रावास में रहने के कारण संक्रमण तेजी से फैलता था। ऐसे में बच्चों का होम्योपैथी से उपचार किया गया, जिसके सकारात्मक नतीजे सामने आए। नवोदय विद्यालय ने इस बारे में प्रमाण पत्र भी दिया है।
किडनी स्टोन और पीसीओडी में असरदार इलाज
डॉ. पिंपले ने बताया कि उन्होंने पिछले 25 वर्षों में 100 से अधिक किडनी स्टोन के मरीजों का बिना ऑपरेशन इलाज किया है। स्टोन के आकार और स्थान के आधार पर इलाज में 3 से 6 महीने का समय लगता है, कुछ मामलों में एक साल भी लग सकता है।
वहीं, महिलाओं में बढ़ रही पीसीओडी की समस्या पर भी होम्योपैथी कारगर साबित हो रही है। डॉ. पिंपले के अनुसार अब तक 100 से अधिक महिलाओं का सफल इलाज किया जा चुका है। एक महिला, जिसे पहले बच्चे के बाद 10 साल तक दूसरा बच्चा नहीं हो पाया था, वह होम्योपैथी इलाज से फिर मां बनी।
चर्म रोगों में भी मिल रही राहत
डॉ. पिंपले ने बताया कि सोरायसिस जैसे गंभीर स्किन डिजीज का भी इलाज संभव है। कई स्किन से जुड़ी बीमारियों का बेहतरीन और स्थायी इलाज होम्योपैथी में उपलब्ध है।
इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि जीवनशैली और खानपान में सुधार के साथ अगर होम्योपैथी अपनाई जाए, तो गंभीर से गंभीर बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है।

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