लखनऊ। UP Government Job Rules 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिए चरित्र सत्यापन के नियम सख्त कर दिए हैं। नई नीति के तहत गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जा सकता है। इसमें हत्या, दुष्कर्म, बलवा और प्रश्नपत्र लीक करने जैसे मामले शामिल हैं। सरकार ने नियुक्ति से पहले अभ्यर्थियों के आपराधिक रिकॉर्ड और अतीत की जांच के लिए एकीकृत व्यवस्था लागू की है।
UP Government Job Rules 2026: हिंसक प्रदर्शन करने वालों पर सख्ती
उत्तर प्रदेश सरकार के नए नियमों के अनुसार, हिंसक गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी हासिल करना मुश्किल हो सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में हिंसक प्रदर्शन और गंभीर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता को चरित्र सत्यापन के दौरान गंभीरता से देखा जाएगा।
खासकर ‘रिजीम चेंज’ के नाम पर हिंसक प्रदर्शन करने वालों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। ऐसे मामलों में अभ्यर्थियों की भूमिका और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच की जाएगी। हालांकि, किसी मामले में केवल नाम आने या आरोप लगने को हर परिस्थिति में दोषसिद्धि के समान नहीं माना जाएगा। अभ्यर्थी की पात्रता संबंधित मामले और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।
सरकारी नौकरी के लिए लागू होगी एकीकृत सत्यापन व्यवस्था
प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी नई नीति के तहत सरकारी विभागों के अलावा निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, सरकारी उपक्रमों, पंचायतों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के लिए चरित्र सत्यापन की एकीकृत व्यवस्था लागू होगी।
नई व्यवस्था में चयनित अभ्यर्थियों को चरित्र सत्यापन और अतीत की जांच पूरी होने से पहले प्रोविजनल नियुक्ति पत्र दिया जा सकेगा। हालांकि, संवेदनशील और सुरक्षा से जुड़े पदों पर नियुक्ति से पहले विस्तृत जांच आवश्यक होगी। पहले से लंबित मामलों का निस्तारण भी नई नीति के आधार पर किया जाएगा।
पुलिस और जिलाधिकारी करेंगे चरित्र सत्यापन
नई नीति के तहत नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थियों का विवरण पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना), गृह जनपद के जिलाधिकारी और उन जिलों के जिलाधिकारियों को भेजेंगे, जहां अभ्यर्थी पिछले पांच वर्षों में एक वर्ष से अधिक समय तक रहा हो।
इसके बाद जिलाधिकारी जिला पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट प्राप्त करके अपनी रिपोर्ट नियुक्ति प्राधिकारी को भेजेंगे। सामान्य मामलों में पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जांच करेंगी। हर मामले में अभ्यर्थी की व्यक्तिगत उपस्थिति या पूछताछ अनिवार्य नहीं होगी।
यदि पुलिस रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। दूसरे राज्य में निर्धारित अवधि तक रहने वाले अभ्यर्थियों के सत्यापन के लिए संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस प्रमुख से भी परामर्श लिया जा सकेगा।
आवेदन में आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य
सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन पत्र और स्वघोषणा पत्र में अपने आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इसमें गिरफ्तारी, अभियोजन और अदालत से दोषी ठहराए जाने से संबंधित विवरण शामिल होंगे।
इसके अलावा, पूर्व सेवा से बर्खास्तगी और अनुचित साधनों के इस्तेमाल के कारण किसी भर्ती आयोग या बोर्ड द्वारा प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी भी देनी होगी।
जानकारी छिपाने पर उम्मीदवारी रद्द हो सकती है। हालांकि, नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि अभ्यर्थी आवेदन में किसी आपराधिक मामले या गिरफ्तारी का उल्लेख नहीं करता, लेकिन बाद में चिकित्सा परीक्षण, प्रमाणन, सत्यापन या स्वघोषणा प्रपत्र में इसकी लिखित जानकारी दे देता है, तो केवल इसी आधार पर उसकी उम्मीदवारी रद्द नहीं की जाएगी।
इन गंभीर मामलों में सरकारी नौकरी के लिए हो सकते हैं अयोग्य
नई नीति के तहत कुछ गंभीर अपराधों में आरोप तय होने या दोषी ठहराए जाने पर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित मामले शामिल हैं:
- हत्या और बलवा: गंभीर हिंसक अपराधों में शामिल अभ्यर्थी।
- दुष्कर्म और दहेज हत्या: महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों से जुड़े मामले।
- पॉक्सो अधिनियम: बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से संबंधित मामले।
- अपहरण: फिरौती के लिए अपहरण जैसे गंभीर अपराध।
- देशद्रोह: संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आने वाले मामले।
- भर्ती में धोखाधड़ी: प्रश्नपत्र लीक करने, साल्वर गैंग चलाने, दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने और फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने जैसे मामले।
- साइबर अपराध: डिजिटल अरेस्ट और यूपीआई के माध्यम से ठगी जैसे अपराध।
- आर्थिक अपराध: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) से जुड़े मामले।
- गैंगस्टर एक्ट: इस कानून के तहत आने वाले मामले।
इन अपराधों से जुड़े मामलों में अभ्यर्थियों की पात्रता नई नीति के प्रावधानों और संबंधित कानूनी स्थिति के अनुसार निर्धारित की जाएगी।

