Haryana Electricity Workers’ Strike: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की करीब 45 घंटे चली हड़ताल शुक्रवार देर शाम समाप्त हो गई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बीच बातचीत के बाद कर्मचारियों ने काम पर लौटने का फैसला किया। हालांकि, इस हड़ताल के कारण प्रदेश के कई शहरों और गांवों में बिजली-पानी का संकट गहरा गया। उद्योगों में उत्पादन ठप होने से लेकर अस्पतालों में मरीजों की जांच प्रभावित होने तक, आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान उद्योग जगत को करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद खत्म हुई हड़ताल
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल बुधवार रात शुरू हुई थी। करीब 45 घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद शुक्रवार शाम लगभग 7:30 बजे हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की गई। पंचकूला स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बीच दूसरे दौर की वार्ता हुई। बातचीत के बाद कर्मचारियों ने काम पर लौटने का निर्णय लिया।
हालांकि, हड़ताल खत्म होने के बाद भी कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करने में समय लगा। बिजली की कमी के कारण पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी उठानी पड़ी।
उद्योगों को 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान
बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में देखने को मिला। भिवानी, पानीपत और यमुनानगर में कई फैक्ट्रियों में 36 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से उत्पादन ठप हो गया। उद्योग जगत को इस दौरान करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है।
यमुनानगर की प्लाईवुड और मेटल इंडस्ट्री में त्योहारी सीजन के ऑर्डर प्रभावित हुए। वहीं, भिवानी में फैक्ट्रियां बंद रहने के कारण कई प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों की ओर लौटने लगे।
झज्जर और हिसार में दवा कारोबारियों को भी परेशानी हुई। कंप्यूटर और प्रिंटर बंद रहने से ई-वे बिल और चालान तैयार नहीं हो सके, जिससे दवाइयों की आपूर्ति प्रभावित हुई। कई पेट्रोल पंपों पर जनरेटर की मदद से ईंधन की आपूर्ति जारी रखी गई।
पानी के लिए परेशान हुए लोग, महंगे किराये पर मंगवाए जनरेटर
बिजली आपूर्ति बाधित होने से प्रदेश के कई इलाकों में पानी का संकट पैदा हो गया। बिजली नहीं होने के कारण बूस्टिंग स्टेशन और सरकारी ट्यूबवेल बंद रहे। इससे लोगों को पीने के पानी के लिए भी परेशान होना पड़ा।
जींद में लोगों को पानी की टंकियां भरने के लिए 800 से 900 रुपये प्रति घंटे के किराये पर जनरेटर मंगवाने पड़े। पानीपत के ग्रामीण इलाकों में जनरेटर की मदद से पानी की व्यवस्था की गई। वहीं, नए बस स्टैंड पर पानी खत्म होने के कारण यात्रियों को बोतलबंद पानी खरीदना पड़ा।
अस्पतालों में मरीजों की जांच और इलाज प्रभावित
बिजली संकट का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा। कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में जनरेटर चलाने के लिए 24 घंटे के भीतर 1,000 लीटर से अधिक डीजल खर्च होने की जानकारी सामने आई। इसकी लागत करीब एक लाख रुपये बताई गई।
इसके बावजूद अस्पताल में लिफ्ट बंद रही और सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी जांच सेवाएं प्रभावित हुईं। अल्ट्रासाउंड मशीनें बंद रहने के कारण 100 से अधिक मरीजों को बिना जांच कराए लौटना पड़ा। कई जगह गंभीर मरीजों की सर्जरी भी टालनी पड़ी।
कई शहरों में प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लोग
बिजली-पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन किया। करनाल के असंध और निसिंग में लोगों ने मुख्य मार्गों पर जाम लगाया। फतेहाबाद के टोहाना, भूना और जाखल में भी प्रदर्शन हुए।
हिसार और हांसी में व्यापारियों ने रास्ते रोके, जबकि फरीदाबाद में महिलाओं ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। गुरुग्राम और नूंह में भी लोगों ने बिजली संकट को लेकर नाराजगी जाहिर की।
यमुनानगर के जगाधरी बस स्टैंड पर जाम के दौरान पुलिस कार्रवाई की खबर सामने आई। वहीं, रेवाड़ी में एक पूर्व बिजली कर्मचारी रह चुके पुलिस जवान की मदद से सब-स्टेशन को दोबारा चालू कराया गया, जिससे 22 गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल करने में मदद मिली।
बिजली वितरण कंपनी को लेकर आम आदमी पार्टी ने उठाए सवाल
हरियाणा में बिजली संकट को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने नूंह और गुरुग्राम में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को पैरलल लाइसेंस दिए जाने पर सवाल उठाए।
ढांडा ने कंपनी के अनुभव और वित्तीय क्षमता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उसकी पेड-अप कैपिटल करीब एक करोड़ रुपये है, जबकि कंपनी लगभग 4,700 करोड़ रुपये के निवेश की बात कर रही है। उन्होंने सरकार से पूछा कि कंपनी को 25 साल के लिए बिजली वितरण की जिम्मेदारी देने के पीछे क्या वजह है।
फिलहाल, हड़ताल समाप्त होने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम शुरू हो गया है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश में बिजली व्यवस्था, औद्योगिक उत्पादन और आवश्यक सेवाओं पर निर्भरता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

