नई दिल्ली। ITBP Shaurya Commandos: भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने अपनी युद्ध तैयारियों को तेज कर दिया है। बल ने ‘शौर्य कमांडो’ नाम से एक नई लड़ाकू इकाई तैयार की है। आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर के मुताबिक, इन कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ गतिरोध के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही बल ड्रोन तकनीक, विशेष सैन्य प्रशिक्षण और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी काम कर रहा है।
हर बॉर्डर बटालियन में तैनात होंगे शौर्य कमांडो
आईटीबीपी प्रमुख ने बताया कि चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सुरक्षा और युद्ध तैयारियों को मजबूत करने की योजना के तहत हर बॉर्डर बटालियन में शौर्य कमांडो तैनात किए जाएंगे। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा की लंबाई लगभग 3,488 किलोमीटर है।
आईटीबीपी अपने जवानों को बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुसार तैयार कर रही है। इसके तहत पारंपरिक युद्ध रणनीतियों के साथ आधुनिक तकनीक और विशेष सैन्य प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है।
ड्रोन वॉरफेयर के लिए मिले 400 करोड़ रुपये
आईटीबीपी ने अपनी सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून गठित किए हैं। जवानों को ड्रोन संचालन और इस तकनीक के इस्तेमाल से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
आईटीबीपी प्रमुख के अनुसार, बल को सरकार से 400 करोड़ रुपये की राशि मिली है। इसमें से 70 प्रतिशत राशि ड्रोन युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी की आधुनिकीकरण योजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इस योजना में ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।
आधुनिक तकनीक का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
गलवान घाटी जैसी परिस्थितियों के लिए विशेष ट्रेनिंग
आईटीबीपी ने जवानों को कठिन युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एक नया स्ट्राइक कोर्स भी तैयार किया है। इसका लक्ष्य जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए जवानों को प्रशिक्षित करना है।
आईटीबीपी प्रमुख के मुताबिक, वर्ष 2027 के अंत तक पूरी फोर्स को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। बाद में चीन ने भी अपने चार सैनिकों की मौत की पुष्टि की थी।
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सीमावर्ती इलाकों में बनाए जा रहे भूमिगत आश्रय स्थल
युद्ध की तैयारियों के साथ-साथ आईटीबीपी सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत कर रही है। आईटीबीपी प्रमुख के अनुसार, अग्रिम इलाकों में भूमिगत आश्रय स्थल बनाने पर काम किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य संभावित संघर्ष के दौरान जवानों को सुरक्षा प्रदान करना है। जमीन के ऊपर बनी संरचनाओं के मुकाबले भूमिगत आश्रय कुछ परिस्थितियों में बेहतर सुरक्षा दे सकते हैं।
इसके अलावा, अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए बैरकों को इंसुलेट करने, सोलर वॉटर हीटर लगाने और दूरदराज की चौकियों पर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
अत्यधिक ठंड में वाहनों को चालू करने में आने वाली परेशानियों को कम करने के लिए कोल्ड-स्टार्ट किट भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य आईटीबीपी को ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक सक्षम बनाना है।
चीन सीमा पर तनाव को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियों और सीमा पर भारत की स्थिति को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में आईटीबीपी के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए सरकार से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार चीन से जुड़े सीमा विवादों पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिशों और वहां बड़े बांध के निर्माण से जुड़ी खबरों का भी जिक्र किया।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि स्थानीय लोगों के अनुसार, लद्दाख की तरह अरुणाचल प्रदेश से जुड़े कुछ पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक भारत की पहुंच प्रभावित हुई है। हालांकि, यह कांग्रेस नेता की ओर से किया गया दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों से बढ़ी चिंता
चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर अपना दावा करता रहा है और भारतीय क्षेत्रों के लिए चीनी नाम जारी करता रहा है। भारत इन दावों को खारिज करता है और अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग मानता है।
वहीं, चीन की ओर से बड़े बांध के निर्माण की खबरों को लेकर भी भारत में पर्यावरण और जल सुरक्षा से संबंधित चिंताएं उठती रही हैं।
ऐसे में आईटीबीपी की नई कमांडो इकाई, ड्रोन तकनीक में निवेश और विशेष युद्ध प्रशिक्षण को चीन सीमा पर सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश में मौजूदा गतिरोध की स्थिति और उससे जुड़े राजनीतिक दावों का आकलन आधिकारिक बयानों तथा स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए।

