Navratri 2026 : नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी हैं। भक्त सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।
इस दिन माता को फूल, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। साथ ही, उनके मंत्रों का जाप और आरती करके परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। आइए जानते हैं मां कूष्मांडा का स्वरूप, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक कथा और विशेष मंत्र।
मां कूष्मांडा का स्वरूप और महत्व
मां कूष्मांडा को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में चौथा स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब माता ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में भी पूजा जाता है।
मां कूष्मांडा को आठ भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, चक्र, गदा, माला और अमृत कलश जैसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र एवं वस्तुएं सुशोभित रहती हैं। माता सिंह पर सवार होती हैं, जो साहस, शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यताओं में मां कूष्मांडा का संबंध सूर्य की ऊर्जा और तेज से भी माना जाता है। भक्त उनकी पूजा करके जीवन में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं।
मां कूष्मांडा पूजा का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा के लिए शुभ समय का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग में तिथि और मुहूर्त की पुष्टि जरूर करें।
प्रचलित पंचांग में बताए गए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:54 बजे से 5:43 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:22 बजे से 3:09 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 4:14 बजे से शाम 5:57 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:17 बजे से 6:42 बजे तक
ध्यान दें: ये समय उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर हैं। इनकी सटीकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। शुभ मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
मां कूष्मांडा की पूजा विधि
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधि अपना सकते हैं:
- सुबह स्नान करें: प्रातः उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल तैयार करें: मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर को साफ चौकी पर स्थापित करें।
- दीपक जलाएं: माता के सामने दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें। यदि घर में घटस्थापना की गई है, तो अपनी परंपरा के अनुसार कलश पूजन करें।
- फूल और अक्षत अर्पित करें: माता को फूल, अक्षत, रोली और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
- भोग लगाएं: माता को मालपुआ, फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई का भोग लगाएं।
- मंत्र जाप करें: मां कूष्मांडा के मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें।
- आरती करें: पूजा के अंत में माता की आरती करें और सुख, शांति, स्वास्थ्य तथा समृद्धि की प्रार्थना करें।
मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि की शुरुआत से पहले चारों ओर घना अंधकार था। उस समय न दिन था, न रात और न ही सृष्टि का वर्तमान स्वरूप। तब आदिशक्ति मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की।
माना जाता है कि माता के तेज से पूरे ब्रह्मांड में प्रकाश फैल गया और सृष्टि के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसी कारण उन्हें ब्रह्मांड की सृजनकर्ता शक्ति के रूप में पूजा जाता है।
भक्तों का विश्वास है कि मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है। नवरात्रि के चौथे दिन उनकी पूजा विशेष श्रद्धा के साथ की जाती है।
मां कूष्मांडा का शक्तिशाली मंत्र
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है:
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार इस मंत्र का 11, 21, 51 या 108 बार जाप कर सकते हैं।
मां कूष्मांडा का ध्यान और मंत्र जाप करते समय मन को शांत रखें और माता से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
मां कूष्मांडा को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक परंपराओं में मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग अर्पित करने की मान्यता प्रचलित है। इसके अलावा फल, मिठाई और अन्य सात्विक पकवान भी श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जा सकते हैं। भोग लगाने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटें।
मां कूष्मांडा की पूजा का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा शक्ति, सकारात्मकता और समृद्धि के प्रति आस्था का प्रतीक है। भक्त माता से जीवन की बाधाओं को दूर करने, परिवार में सुख-शांति बनाए रखने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से की गई पूजा और प्रार्थना से भक्तों को आत्मिक शांति तथा विश्वास मिलता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर माता की आराधना कर श्रद्धालु अपने जीवन में सुख और मंगल की कामना करते हैं।

