Chhattisgarh Coal Levy Scam : रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाले की जांच अब कोयला परिवहन से आगे बढ़कर लौह अयस्क और आयरन पैलेट के परिवहन तक पहुंच गई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 5 अक्टूबर 2026 को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किए गए छठे पूरक अभियोग पत्र में आयरन पैलेट के परिवहन पर प्रति टन 100 रुपये की कथित अवैध वसूली का उल्लेख किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित व्यवस्था में कोयला परिवहन पर 25 रुपये प्रति टन और आयरन पैलेट परिवहन पर 100 रुपये प्रति टन की वसूली किए जाने का आरोप है। EOW का दावा है कि इस कथित नेटवर्क में अधिकारियों, कारोबारियों और सिंडिकेट से जुड़े लोगों की भूमिका रही। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।
19.05 करोड़ टन उत्पादन, 100 रुपये प्रति टन के हिसाब से ₹1,905 करोड़
EOW की जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में करीब 19.05 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन हुआ था।
यदि इस पूरी उत्पादन मात्रा पर कथित 100 रुपये प्रति टन की दर लागू की जाए तो राशि करीब ₹1,905 करोड़ बैठती है।
हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹1,905 करोड़ वास्तविक अवैध वसूली का प्रमाणित आंकड़ा नहीं है। यह केवल लौह अयस्क उत्पादन की मात्रा और कथित 100 रुपये प्रति टन की दर के आधार पर निकाली गई अनुमानित राशि है। वास्तविक वसूली कितनी हुई, इसका निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
IAS जयप्रकाश मौर्य की भूमिका पर भी सवाल
EOW के छठे पूरक अभियोग पत्र में तत्कालीन भौमिकी एवं खनिकर्म संचालक IAS जयप्रकाश मौर्य की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि आयरन पैलेट कारोबारियों से प्रति टन 100 रुपये की कथित वसूली की व्यवस्था में उनकी भूमिका थी। EOW के मुताबिक, जांच के दौरान जब्त एक डायरी में जयप्रकाश मौर्य को करीब एक करोड़ रुपये दिए जाने से संबंधित कथित प्रविष्टियां मिली हैं।
महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त आज, 67 लाख महिलाओं के खाते में आएंगे 632 करोड़
हालांकि, डायरी में दर्ज कथित प्रविष्टियों और अन्य आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।
9,500 पन्नों के अभियोग पत्र में 12 आरोपी
EOW ने 5 अक्टूबर को रायपुर की विशेष अदालत में करीब 9,500 पन्नों का छठा पूरक अभियोग पत्र पेश किया। इसमें कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
आरोपियों में भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय, पूर्व प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और IAS जयप्रकाश मौर्य समेत अन्य लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं।
जांच एजेंसी ने कथित तौर पर दस्तावेजों, व्हाट्सऐप चैट, बैंक लेन-देन और डायरी में दर्ज प्रविष्टियों को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किया है।
‘पाल ग्रुप’ और ‘टुडे ग्रुप’ का भी जिक्र
जांच के दौरान सामने आए आरोपों के मुताबिक, कथित सिंडिकेट ने परिवहन और वसूली से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए अलग-अलग व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए थे। इनमें ‘पाल ग्रुप’ और ‘टुडे ग्रुप’ का उल्लेख किया गया है।
EOW का आरोप है कि कथित तौर पर नकद भुगतान की पुष्टि होने के बाद परिवहन संबंधी अनुमति को आगे बढ़ाया जाता था। एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि कथित तौर पर जुटाई गई रकम को विभिन्न वित्तीय लेन-देन के जरिए संपत्तियों में निवेश किया गया।
कोयला परिवहन में ₹540 करोड़ की कथित वसूली
कोयला लेवी मामले में पहले से ही जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच करीब 540 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली का आरोप है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से कथित तौर पर 25 रुपये प्रति टन की दर से वसूली की जाती थी। एजेंसियों का आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर अधिकारियों और राजनीतिक व्यक्तियों को भुगतान करने तथा चल-अचल संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया।
आयरन पैलेट मामले से बढ़ा जांच का दायरा
आयरन अयस्क और आयरन पैलेट परिवहन में कथित अवैध वसूली का एंगल सामने आने के बाद EOW की जांच का दायरा और बढ़ता दिखाई दे रहा है। एजेंसी अब वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।
फिलहाल ₹1,905 करोड़ का आंकड़ा अनुमानित है, जिसे 2018 से 2023 के बीच दर्ज लौह अयस्क उत्पादन और कथित 100 रुपये प्रति टन की दर के आधार पर निकाला गया है। वास्तविक अवैध वसूली कितनी हुई और मामले में किसकी क्या भूमिका रही, इसका अंतिम निर्धारण जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद ही होगा।

