Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह अवधि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और तर्पण के लिए समर्पित होती है। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान विधि-विधान से पूजा, तर्पण और दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इसी क्रम में पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। पितृपक्ष में पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और जल अर्पित करने जैसी परंपराएं भी प्रचलित हैं।
हालांकि, पितृ दोष और उससे जुड़े उपाय धार्मिक मान्यताओं का विषय हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अगर आप भी पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए पारंपरिक उपाय करना चाहते हैं, तो पीपल से जुड़े इन उपायों को जान सकते हैं।
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पीपल के पेड़ पर चढ़ाएं काले तिल वाला जल
पितृपक्ष के दौरान सुबह स्नान करने के बाद तांबे या पीतल के पात्र में स्वच्छ जल लें। इसमें काले तिल और फूल डालकर पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पित करने की धार्मिक परंपरा बताई गई है।
इस दौरान पितरों का स्मरण करते हुए ‘ॐ सर्व पितृ देवाय नम:’ मंत्र का जाप किया जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना पूरी होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शाम को जलाएं चौमुखी दीपक
पितृपक्ष में पीपल के पेड़ के नीचे शाम के समय दीपक जलाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सरसों के तेल का चौमुखी दीपक पीपल के पास जलाने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
दीपक जलाते समय पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा निभाई जाती है।
मीठा जल और लौंग अर्पित करने की मान्यता
पितृ दोष से जुड़े धार्मिक उपायों में पीपल के पेड़ की पूजा का भी उल्लेख मिलता है। एक पात्र में जल लेकर उसमें थोड़ा कच्चा दूध, बताशे और लौंग मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करने की परंपरा कुछ स्थानों पर बताई जाती है।
इसके बाद पीपल के पेड़ की 5 या 7 बार परिक्रमा करने की मान्यता है। माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इस उपाय से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।
मंगलवार और शनिवार को करें हनुमान चालीसा का पाठ
पीपल के पेड़ के पास मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने की भी धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि इससे नकारात्मकता और संकट दूर होते हैं तथा भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है।
पितृपक्ष में रखें श्रद्धा और नियमों का ध्यान
पितृपक्ष के दौरान तर्पण, श्राद्ध, दान और पूजा जैसे कर्म श्रद्धा के साथ किए जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनसे जुड़े नियम और परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी विशेष कर्मकांड को करने से पहले स्थानीय परंपरा या योग्य आचार्य की सलाह लेना उचित माना जाता है।

