First Lok Sabha Election : नई दिल्ली: भारत में पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ था। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक उस चुनाव में 489 लोकसभा सीटों के लिए 401 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव कराया गया था। इनमें 314 निर्वाचन क्षेत्रों से एक-एक सदस्य और 86 निर्वाचन क्षेत्रों से दो-दो सदस्य चुने गए थे।
यह चुनाव सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण था। करीब 17.3 करोड़ मतदाता चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा थे और देशभर में करीब 1.96 लाख मतदान केंद्र बनाए गए थे।
महिलाओं की पहचान बनी बड़ी चुनौती
पहले आम चुनाव की तैयारियों के दौरान मतदाता सूची तैयार करना चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती थी। उस समय बड़ी संख्या में महिलाओं की पहचान उनके खुद के नाम के बजाय किसी पुरुष रिश्तेदार की पत्नी, मां या बेटी के रूप में दर्ज की जा रही थी।
पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने मतदाता सूची में महिलाओं की व्यक्तिगत पहचान दर्ज करने पर जोर दिया। सेन 21 मार्च 1950 से 19 दिसंबर 1958 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे।
28 लाख महिलाओं के नाम हटाने की कहानी
आपके दिए विवरण के अनुसार, जब महिलाओं के नाम उनके स्वयं के नाम से दर्ज करने की कोशिश की गई तो करीब 28 लाख महिलाओं ने अपना नाम दर्ज कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
हालांकि, इस विशेष 28 लाख और बाद में करीब 85% महिलाओं के नाम दोबारा जुड़ने वाले विवरण की पुष्टि मुझे उपलब्ध चुनाव आयोग के आधिकारिक स्रोतों में नहीं मिली। इसलिए इसे तथ्य के रूप में लिखने के बजाय संबंधित ऐतिहासिक स्रोत का हवाला देना बेहतर होगा।
सुकुमार सेन के सामने थी बड़ी जिम्मेदारी
भारत के पहले आम चुनाव का आयोजन बेहद कठिन परिस्थितियों में किया गया था। चुनाव आयोग के अनुसार देशभर में करीब 1.96 लाख मतदान केंद्र बनाए गए थे और लगभग 6.2 करोड़ मतपत्र छापे गए थे। करीब 10.6 करोड़ लोगों ने मतदान किया।
पहली लोकसभा का गठन चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 2 अप्रैल 1952 को हुआ।
पहली बार इतने बड़े पैमाने पर लोकतांत्रिक प्रयोग
1951-52 का चुनाव स्वतंत्र भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर आयोजित पहला आम चुनाव था। सीमित संसाधनों, विशाल भौगोलिक क्षेत्र और बड़ी आबादी के बीच चुनाव कराना चुनाव आयोग के लिए ऐतिहासिक प्रशासनिक चुनौती थी।

