PF केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बड़ा फैसला; 12 साल बाद बढ़ी ईपीएफओ (PF)की अनिवार्य वेज सीलिंग, संगठित क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा का दायरा होगा और व्यापक।
नई दिल्ली: देश के संगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और बहुप्रतीक्षित फैसला लिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य भविष्य निधि (PF) कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा (Wage Ceiling) को ₹15000 से बढ़ाकर ₹25000 प्रति माह करने की औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस कदम से देशभर के 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को सीधे तौर पर सामाजिक सुरक्षा और पेंशन का सुरक्षा कवच मिलेगा।
12 साल बाद वेतन सीमा में हुआ संशोधन
ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा में पिछला संशोधन सितंबर 2014 में किया गया था, जब इसे ₹6500 से बढ़ाकर ₹15000 किया गया था। पिछले एक दशक से अधिक समय से बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और बुनियादी वेतन में हुई बढ़ोतरी के मद्देनज़र कर्मचारी संगठन इस सीमा को बढ़ाने की मांग कर रहे थे। सरकार का यह फैसला बाजार के मौजूदा वेतन स्तरों और आर्थिक परिस्थितियों के अनुकूल है, जिससे औपचारिक रोजगार के दायरे का तेजी से विस्तार होगा।
कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा असर और क्या होंगे फायदे?
नियमों के तहत 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में ईपीएफ लागू होता है। अब तक ₹15000 से अधिक मूल वेतन (बेसिक सैलरी + डीए) वाले कर्मचारियों के लिए पीएफ अनिवार्य नहीं था, जिससे कई निजी कंपनियां उनका पीएफ खाता नहीं खोलती थीं। नई व्यवस्था लागू होने से कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
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अनिवार्य बचत और पेंशन: अब ₹25000 तक बेसिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का 12% पीएफ कटेगा और नियोक्ता (कंपनी) को भी अनिवार्य रूप से 12% का योगदान देना होगा। कंपनी के इस योगदान में से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में और शेष 3.67% पीएफ खाते में जाएगा।
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मजबूत रिटायरमेंट फंड: वेतन सीमा बढ़ने से कर्मचारियों का पीएफ कॉर्पस तेजी से बढ़ेगा, जिससे सेवानिवृत्ति के समय उन्हें एकमुश्त बड़ा फंड मिलेगा और उनकी मासिक पेंशन पात्रता में भी सुधार होगा।
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निःशुल्क जीवन बीमा: ईपीएफओ के दायरे में आने वाले सभी नए कर्मचारियों को ‘कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना’ (EDLI) के तहत ₹7 लाख तक का निःशुल्क जीवन बीमा कवर स्वतः प्राप्त होगा।
टेक-होम सैलरी और कंपनियों की लागत
इस फैसले से ₹15,000 से ₹25,000 के बीच वेतन पाने वाले कर्मचारियों की इन-हैंड (टेक-होम) सैलरी में थोड़ी कटौती जरूर होगी, क्योंकि उनका 12% हिस्सा पीएफ में जमा होगा। हालांकि, कंपनी की ओर से भी बराबर का 12% योगदान मिलने के कारण कर्मचारियों की शुद्ध वित्तीय बचत दोगुनी हो जाएगी। वहीं, कंपनियों के सामाजिक सुरक्षा खर्च में इजाफा होगा, लेकिन इससे कर्मचारियों में नौकरी के प्रति सुरक्षा और भरोसा बढ़ेगा।
सरकार का यह निर्णय न केवल कामगारों के भविष्य को वित्तीय रूप से सुरक्षित करेगा, बल्कि देश के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को भी एक नई मजबूती प्रदान करेगा।

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