रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर चेतन बोरघारिया को ED ने गिरफ्तार कर छह दिन की रिमांड पर लिया है। यह कार्रवाई CGPSC भर्ती परीक्षा 2021-22 में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत हुई है।
ADM चेतन बोरघारिया ED रिमांड पर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ED ने चेतन बोरघारिया को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया। अदालत ने उन्हें छह दिन की ED रिमांड पर भेजा है। बताया गया है कि बोरघारिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD के रूप में भी काम कर चुके हैं।
जांच एजेंसी अब उनसे कथित आर्थिक लेनदेन, भर्ती प्रक्रिया में भूमिका और मामले से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर सकती है।
CGPSC मामले में पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
CGPSC भर्ती घोटाला लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा रहा है। राज्य सरकार ने 2021 की राज्य सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच CBI को सौंपने का फैसला किया था। बाद में मामले की जांच में कई अधिकारियों और अन्य लोगों के नाम सामने आए। 2024 में EOW ने भी पूर्व PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी।
अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से ED की जांच आगे बढ़ने के बाद मामले में नई कार्रवाई देखने को मिल रही है।
CM साय ने पहले भी दिया था सख्त कार्रवाई का संकेत
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहले भी CGPSC मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने विधानसभा में कहा था कि PSC घोटाले की जांच CBI कर रही है और दोषी लोग जेल में हैं।
ED की हालिया कार्रवाई के बाद सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि किसी आरोपी की गिरफ्तारी या रिमांड अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है; मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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