वेब न्यूज़ पोर्टल संघर्ष के स्वर

संघर्ष ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

Electricity Privatization : छत्तीसगढ़ में बिजली निजीकरण पर बवाल, टाटा पावर को वितरण देने की तैयारी का विरोध

Electricity Privatization : रायपुर/कोरबा, 27 अगस्त। छत्तीसगढ़ में विद्युत वितरण व्यवस्था के निजीकरण को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपने के प्रस्ताव का छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने विरोध किया है। यूनियन ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को आपत्ति पत्र सौंपकर प्रस्तावित विद्युत वितरण लाइसेंस की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की है।

टाटा पावर को लेकर उठे सवाल

प्रस्ताव को लेकर टाटा पावर का नाम सामने आने के बाद बिजली कर्मचारियों और संगठनों की चिंता बढ़ गई है। यूनियन का कहना है कि बिजली वितरण जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवा को निजी हाथों में सौंपने से उपभोक्ताओं और कर्मचारियों पर इसका असर पड़ सकता है।

CG Job Vacancy : छत्तीसगढ़ में 100 पदों पर सीधी भर्ती को मंजूरी, सहायक ग्रेड-3 के लिए युवाओं को मिलेगा रोजगार का मौका

हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था, कंपनी की भूमिका और वितरण लाइसेंस को लेकर अंतिम निर्णय नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इस मुद्दे पर कर्मचारी संगठन ने अपना विरोध दर्ज कराया है।

जनता यूनियन ने आयोग को सौंपा आपत्ति पत्र

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने नियामक आयोग के समक्ष अपनी आपत्तियां रखी हैं। यूनियन ने प्रस्तावित विद्युत वितरण लाइसेंस की प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि बिजली वितरण व्यवस्था राज्य की महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा है और इसके संचालन को लेकर किसी भी बड़े बदलाव से पहले कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं के हितों पर व्यापक विचार किया जाना चाहिए।

कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंता

निजीकरण के विरोध में सबसे बड़ा मुद्दा बिजली विभाग के कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी है। कर्मचारी संगठन आशंका जता रहा है कि निजी कंपनी को वितरण व्यवस्था सौंपे जाने की स्थिति में मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों, रोजगार और कार्यप्रणाली पर प्रभाव पड़ सकता है।

यूनियन ने सरकार और नियामक संस्था से कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखने की मांग की है।

उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?

बिजली वितरण व्यवस्था में बदलाव का सीधा संबंध लाखों उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतों से है। ऐसे में निजीकरण होने पर बिजली बिल, शिकायत निवारण, कनेक्शन, मीटरिंग और बिजली आपूर्ति जैसी सेवाओं पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि उपभोक्ताओं को बेहतर और सस्ती बिजली सेवा मिलना प्राथमिकता होनी चाहिए।

About The Author

YouTube Shorts Autoplay