नई दिल्ली: Hariyali Teej 2026: सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाने वाली हरियाली तीज सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी लड़कियां भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं। हरियाली तीज पर हरे रंग के कपड़े, हरी चूड़ियां और मेहंदी का विशेष महत्व माना जाता है।
हरियाली तीज पर हरा रंग क्यों पहनते हैं?
धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार, हरा रंग प्रकृति, खुशहाली, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। सावन के महीने में चारों ओर हरियाली दिखाई देती है और बारिश के कारण प्रकृति में नई ऊर्जा आती है। इसी वजह से हरियाली तीज पर हरे रंग को विशेष शुभ माना जाता है।
महिलाएं इस दिन हरे रंग की साड़ी, लहंगा या अन्य पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं। इसके साथ ही हरी चूड़ियां और मेहंदी लगाने की परंपरा भी है।
शिव-पार्वती के प्रेम से क्या है संबंध?
हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया।
इसी कारण हरियाली तीज पर महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। हरे रंग को भी इस पवित्र रिश्ते, प्रेम और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
प्रकृति और हरियाली से भी जुड़ा है हरा रंग
‘हरियाली तीज’ नाम ही इस पर्व के प्रकृति से गहरे संबंध को दर्शाता है। सावन में बारिश के बाद पेड़-पौधे और खेत हरे-भरे हो जाते हैं। ऐसे में हरा रंग उपजाऊपन, समृद्धि और जीवन में नई ऊर्जा का प्रतीक बन जाता है।
कई धार्मिक मान्यताओं में हरे रंग को सकारात्मकता, विकास और खुशहाली से भी जोड़ा गया है। इसलिए इस दिन हरे वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
हरी चूड़ियां और मेहंदी का भी महत्व
हरियाली तीज पर हरी चूड़ियां पहनने और हाथों में मेहंदी लगाने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। मेहंदी और सोलह श्रृंगार को सुहाग एवं सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। महिलाएं इस दिन सजने-संवरने के साथ माता पार्वती की पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
हरियाली तीज का संदेश
हरियाली तीज केवल श्रृंगार और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, प्रेम, भक्ति और दांपत्य जीवन की खुशहाली का भी प्रतीक माना जाता है। हरा रंग इस पर्व की इसी भावना को दर्शाता है—प्रकृति की हरियाली के साथ जीवन में प्रेम, सुख और समृद्धि बनी रहे।

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