Sawan 2026 : नई दिल्ली। सावन का पावन महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रावण मास में शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक सहित कई तरह की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय भगवान शिव के विशेष नामों का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय भगवान शिव के तीन विशेष नामों का उच्चारण करने से भक्त को मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भगवान शिव के कौन से हैं 3 विशेष नाम?
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में भगवान शिव को जल अर्पित करते समय इन तीन नामों का स्मरण किया जा सकता है—
- हे अष्टकेश्वर महादेव
- हे कुंदकेश्वर महादेव
- हे शंभवेश्वर महादेव
मान्यता है कि जलाभिषेक के दौरान श्रद्धा और एकाग्रता के साथ इन नामों का जाप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
अष्टकेश्वर महादेव का क्या महत्व है?
धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव के अलग-अलग स्वरूपों और ज्योतिर्लिंगों के अलावा अनेक शिव स्वरूपों का उल्लेख मिलता है। अष्टकेश्वर महादेव को भगवान शिव का एक विशेष स्वरूप माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अष्टकेश्वर महादेव की पूजा करने से व्यक्ति को रोग, शारीरिक कष्ट और परेशानियों से राहत मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वाराणसी में अष्टकेश्वर महादेव से जुड़ा धार्मिक स्थल भी बताया जाता है।
कुंदकेश्वर महादेव की मान्यता
कुंदकेश्वर महादेव भी भगवान शिव के विशेष स्वरूपों में माने जाते हैं। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में कुंदकेश्वर महादेव से जुड़ा धार्मिक स्थल बताया जाता है।
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से भक्तों को जीवन की विभिन्न परेशानियों से मुक्ति मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शंभवेश्वर महादेव का स्मरण क्यों माना जाता है शुभ?
भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूपों में शंभवेश्वर महादेव का भी उल्लेख किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इनके नाम का स्मरण करने से व्यक्ति को तनाव, निराशा और जीवन की बाधाओं से उबरने के लिए आध्यात्मिक संबल मिलता है।
सावन में शिव आराधना के दौरान इन तीनों नामों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करना भक्तों के बीच शुभ माना जाता है।
सावन में कैसे करें भगवान शिव का जलाभिषेक?
सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय भक्त श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखते हुए पूजा कर सकते हैं। जल अर्पित करते समय भगवान शिव का ध्यान करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार ‘हे अष्टकेश्वर महादेव’, ‘हे कुंदकेश्वर महादेव’ और ‘हे शंभवेश्वर महादेव’ का स्मरण करें।
ध्यान रहे कि ये बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और संप्रदायों में पूजा-पद्धति तथा मान्यताएं अलग हो सकती हैं।

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