Dabur Products : नई दिल्ली। देश की प्रमुख आयुर्वेदिक और एफएमसीजी कंपनियों में शामिल डाबर के कुछ उत्पादों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ‘100% शुद्ध’ होने के दावे के साथ बेचे जा रहे कंपनी के कुछ उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। कार्रवाई के दायरे में शहद, गाय का घी समेत कई खाद्य उत्पाद शामिल बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों से 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है। इस घटनाक्रम के बाद खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले दावों और उनकी गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
‘100% शुद्ध’ दावे की जांच के बाद कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, FSSAI ने उन उत्पादों की समीक्षा शुरू की थी, जिनकी पैकेजिंग और प्रचार में ‘100% शुद्ध’ होने का दावा किया गया था। प्रारंभिक जांच के आधार पर संबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही संबंधित पक्षों से इस दावे के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले दावे निर्धारित मानकों और नियमों के अनुरूप होने चाहिए।
शहद और गाय का घी भी शामिल
कार्रवाई के दायरे में डाबर के शहद और गाय के घी सहित कई खाद्य उत्पाद शामिल बताए जा रहे हैं। इन उत्पादों की बिक्री पर फिलहाल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभाग अब यह जांच करेगा कि उत्पादों की लेबलिंग, गुणवत्ता और विज्ञापन संबंधी दावे खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
15 दिनों में मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
FSSAI ने संबंधित अधिकारियों और पक्षों को निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उत्पादों पर लगी रोक जारी रहेगी या आवश्यक सुधारों के बाद उन्हें बाजार में फिर से बिक्री की अनुमति दी जाएगी।
उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा पर जोर
खाद्य सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर किए जाने वाले दावे वैज्ञानिक तथ्यों और निर्धारित मानकों के अनुरूप होने चाहिए। यदि कोई कंपनी किसी उत्पाद को “100% शुद्ध” बताकर बाजार में उतारती है, तो उसे इसके समर्थन में आवश्यक प्रमाण उपलब्ध कराने होते हैं।
ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना तथा भ्रामक दावों पर रोक लगाना है।

More Stories
Air India Flight Turbulence : फुकेट-दिल्ली फ्लाइट तेज टर्बुलेंस में फंसी, 15 यात्री घायल, 300 फीट नीचे गिरा विमान, मची अफरा-तफरी
CBSE Three Language Rule : कक्षा 9 में तीन भाषाएं अनिवार्य करने के नियम पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग, जानें पूरा मामला
Raja Raghuwanshi Murder Case : राजा-सोनम की शादी का कैटरिंग बिल बना नया विवाद: 11.42 लाख के बिल में 2.82 लाख बाकी, कैटरर ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी