वॉशिंगटन/तेहरान: US Iran War लगातार और गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए HIMARS मिसाइल सिस्टम और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 20 जुलाई की रात चलाए गए अभियान में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, समुद्री सैन्य क्षमताओं तथा एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। यह ईरान के खिलाफ अमेरिका की लगातार 10वीं सैन्य स्ट्राइक थी।
ईरान का दावा- कुवैत के अमेरिकी ठिकानों पर हमला
ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि कुवैत के कैंप अरिफजान, कैंप अल-अदीरी और अहमद अल-जाबेर एयरबेस पर कामिकाजे ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया गया। ईरान का कहना है कि हमले में अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और HIMARS रॉकेट सिस्टम को नुकसान पहुंचा है।
हालांकि, अमेरिका या कुवैत की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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दक्षिणी ईरान में कई जगह धमाके
ईरानी मीडिया के अनुसार, सीरिक, बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप, चाबहार, कोनारक और शिराज समेत कई इलाकों में देर रात विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। वहीं, बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर सक्रिय कर दिया गया।
हूती विद्रोहियों ने सऊदी के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है। हूतियों ने कहा कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी जहाज अब उनके निशाने पर रहेंगे। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और दुनिया के लगभग 10% समुद्री व्यापार का रास्ता है।
ट्रम्प के सामने दो विकल्प
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सामने फिलहाल दो विकल्प हैं। पहला, कतर, मिस्र और पाकिस्तान की मध्यस्थता से प्रस्तावित 10 दिन के सीजफायर को स्वीकार करना और दूसरा, इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू करना।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से सीजफायर पर कोई सहमति नहीं बनी है और हमले जारी हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित मध्यस्थता की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड करीब 0.4% गिरकर 88.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग स्थिर रहा।
विशेषज्ञों की राय
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान फिलहाल अमेरिकी नौसैनिक बेड़े पर सीधे हमला करने से बच रहा है, क्योंकि इससे अमेरिका की ओर से कहीं अधिक व्यापक सैन्य कार्रवाई हो सकती है। इसलिए ईरान अपनी जवाबी कार्रवाई को खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक सीमित रखने की रणनीति अपना रहा है।

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