High Court’ बिलासपुर, 20 जुलाई। आंधी-तूफान और भारी बारिश के दौरान बिलासपुर शहर में होने वाले जलभराव और लगातार बिजली कटौती के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि केवल कार्ययोजना तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका असर आम नागरिकों को जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम, बिजली वितरण कंपनी और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।
बारिश में शहर की व्यवस्था फिर हुई बेपटरी
हाल के दिनों में हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में घंटों पानी भरा रहा। सड़कों, कॉलोनियों और बाजार क्षेत्रों में जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं तेज हवा और बारिश के दौरान कई इलाकों में बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें भी सामने आईं।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि हर साल मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी काम नहीं हो रहा है।
कोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और बिजली लाइनों के रखरखाव को लेकर क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि जिन क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया गया था, वहां अब तक क्या सुधार कार्य पूरे हुए हैं।
कोर्ट ने कहा कि अगर योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित रहें और जनता को राहत न मिले, तो ऐसी योजनाओं का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
“जमीनी असर दिखना चाहिए”
न्यायालय की टिप्पणी काफी सख्त रही। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन बार-बार कार्ययोजना और बैठकों का हवाला देता है, लेकिन नागरिकों को न तो जलभराव से राहत मिल रही है और न ही निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो पा रही है।
अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है और यह सुनिश्चित किया जाए कि मानसून के दौरान नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो।
हाईकोर्ट ने नगर निगम को जल निकासी व्यवस्था की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिजली विभाग से कहा गया है कि बार-बार होने वाली कटौती के कारणों और उन्हें रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी शपथपत्र के साथ प्रस्तुत की जाए।

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