CG School News : रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रार्थना के दौरान मंत्रोच्चार को अनिवार्य किए जाने के फैसले को लेकर राज्य की राजनीति गर्मा गई है। एक ओर इस निर्णय का समर्थन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी संगठनों, ईसाई संस्थाओं और कांग्रेस ने इस आदेश का विरोध करते हुए इसे न्यायालय में चुनौती दी है। इस बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार अपने फैसले पर कायम है और सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार की व्यवस्था निर्बाध रूप से जारी रहेगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और अच्छे संस्कारों का विकास करना है।
‘शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी’
रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का माध्यम भी होते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रोच्चार का निर्णय विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों को विकसित करने की भावना से लिया गया है।
मंत्री ने कहा कि सरकार मानती है कि शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण के लिए आवश्यक हैं और इसी सोच के तहत यह फैसला लिया गया है।
फैसले को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
सरकार के आदेश के खिलाफ कई आदिवासी संगठनों, ईसाई संस्थाओं और कांग्रेस ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाओं में आदेश पर विभिन्न संवैधानिक और सामाजिक आधारों पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी समुदायों के विद्यार्थियों की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए।
मामला फिलहाल न्यायालय के विचाराधीन है और इस पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।
कांग्रेस पर मंत्री का निशाना
शिक्षा मंत्री ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के हित में सकारात्मक वातावरण तैयार करना है, लेकिन विपक्ष ने इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि बच्चों से जुड़े इस निर्णय को लेकर अदालत का सहारा लिया गया।
हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान करती है और अपना पक्ष कानूनी रूप से रखेगी।
आदेश जारी रहेगा
गजेंद्र यादव ने दोहराया कि जब तक न्यायालय की ओर से कोई अलग निर्देश नहीं आता, तब तक सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार से संबंधित आदेश प्रभावी रहेगा। उन्होंने अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन को निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था बनाए रखने की बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों में अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक वातावरण विकसित होगा।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
मंत्रोच्चार को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस लगातार जारी है। समर्थक इसे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और नैतिक शिक्षा का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि विरोध करने वाले पक्ष इसे धर्मनिरपेक्षता, विविधता और संवैधानिक मूल्यों के संदर्भ में देख रहे हैं।
अब इस पूरे विवाद पर सभी की नजर उच्च न्यायालय की सुनवाई पर टिकी है। न्यायालय के निर्णय के बाद ही इस मुद्दे की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। तब तक राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि वह अपने आदेश पर कायम रहेगी और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार स्कूलों में मंत्रोच्चार जारी रहेगा।

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