मुंड माला का वो रहस्य जिसने माता पार्वती को किया हैरान
पौराणिक प्रसंगों के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने महादेव को देखकर एक कौतूहलवश प्रश्न पूछा। उन्होंने पूछा कि महादेव ने अपने गले में मुंड माला (खोपड़ियों की माला) कब और क्यों धारण करना शुरू किया? इस सीधे सवाल पर भोलेनाथ ने मुस्कुराते हुए जो उत्तर दिया, उसने माता पार्वती को अचंभित कर दिया।
महादेव ने कहा, “हे पार्वती! इस माला में मौजूद हर एक सिर तुम्हारे पिछले जन्मों का प्रतीक है। जब भी तुम्हारा नया जन्म होता है और तुम शरीर त्यागती हो, मैं तुम्हारी स्मृति में अपनी इस माला में एक और सिर जोड़ लेता हूं।”
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यह सुनकर माता पार्वती ने गंभीर होकर पूछा, “मैं बार-बार जन्म लेती हूं, मृत्यु को प्राप्त होती हूं, लेकिन आप अजर-अमर हैं। ऐसा क्यों? कृपया मुझे इसका असल कारण बताइए।” महादेव ने उत्तर दिया कि इसके लिए उन्हें ‘अमर कथा’ (अमरता का वृत्तांत) सुनना होगा, जिसे सुने बिना कोई भी जीव मृत्यु के चक्र से मुक्त नहीं हो सकता।
अमरनाथ गुफा का चयन और नंदी का पहला त्याग
माता पार्वती के हठ के बाद भगवान शिव उन्हें संपूर्ण कथा सुनाने के लिए तैयार तो हो गए, लेकिन इसके पीछे एक सख्त शर्त थी। यह परम रहस्यमयी कथा कोई अन्य जीव, पशु, पक्षी या मानव न सुन सके, इसके लिए एक अत्यंत गुप्त और निर्जन स्थान की तलाश शुरू हुई। महादेव ने इसके लिए हिमालय की दुर्गम ऊंचाइयों पर स्थित अमरनाथ गुफा (Amarnath Cave) को चुना।
पवित्र गुफा की ओर बढ़ते हुए महादेव ने सांसारिक और अपने प्रिय प्रतीकों का एक-एक करके त्याग करना शुरू कर दिया, ताकि कथा की गोपनीयता भंग न हो। इसी क्रम में उन्होंने सबसे पहले अपने परम भक्त, वाहन और द्वारपाल नंदी (बैल) को पहलगाम में ही छोड़ दिया। यही कारण है कि आज भी अमरनाथ यात्रा का यह अहम पड़ाव पहलगाम के नाम से जाना जाता है, जिसे नंदी के त्याग की भूमि माना जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए क्या है इसका महत्व?
इस साल अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए यह कथा सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि यात्रा का मार्गदर्शक है। जब भक्त पहलगाम से अपनी पैदल यात्रा शुरू करते हैं, तो वे इसी पौराणिक मार्ग का अनुसरण करते हैं। श्राइन बोर्ड ने तीर्थयात्रियों के लिए सलाह जारी की है कि वे इस मार्ग की पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व को समझें। प्रशासन ने पहलगाम से लेकर पवित्र गुफा तक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि इस प्राचीन और आध्यात्मिक मार्ग पर श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।


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