अधिक मास पूर्णिमा 2026 नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अधिक मास की पूर्णिमा का अत्यंत आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व माना गया है। इस वर्ष यह पावन तिथि रविवार, 31 मई को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की पूजा और व्रत कथा का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस पूजा को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सत्यनारायण पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लेनी चाहिए, जिसमें भगवान सत्यनारायण की मूर्ति या चित्र, पीला वस्त्र, तांबे या मिट्टी का कलश, आम या केले के पत्ते, नारियल, रोली, चंदन, अक्षत, मौली, ताजे फूल, तुलसी दल और पंचामृत शामिल हैं। इसके साथ ही प्रसाद के रूप में आटे की पंजीरी, चूरमा और फल का उपयोग किया जाता है।
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घर पर सरल विधि से पूजा कैसे करें
पूजा की शुरुआत सुबह स्नान करके स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करने से होती है। इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर पीला कपड़ा बिछाया जाता है और भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। कलश में जल भरकर आम के पत्तों और नारियल के साथ स्थापना की जाती है।इसके बाद भगवान को रोली, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित किए जाते हैं। दीपक और धूप जलाकर पंचामृत एवं प्रसाद का भोग लगाया जाता है। पूजा के दौरान तुलसी पत्र का विशेष महत्व होता है, क्योंकि भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है।इसके बाद श्रद्धा भाव से सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है। कथा पूर्ण होने के बाद आरती की जाती है और भगवान से आशीर्वाद की कामना की जाती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
पूजा के दौरान वातावरण को पूर्णतः सात्विक रखना आवश्यक होता है। परिवार के सभी सदस्यों को मिलकर कथा सुनने से इसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। पूजा संपन्न होने के बाद सबसे पहले चरणामृत ग्रहण किया जाता है और फिर प्रसाद का वितरण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूजा से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
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