दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को निर्देश दिया है कि वे फिल्म Dhurandhar-2 में दिखाए गए कुछ दृश्यों को लेकर उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर विचार करें और उचित निर्णय लें।
क्या है मामला?
यह याचिका सशस्त्र सीमा बल (SSB) के हेड कांस्टेबल दीपक कुमार द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में भारतीय सेना की ऑपरेशनल जानकारी, सैन्य रणनीतियों और संवेदनशील रक्षा परियोजनाओं से जुड़े दृश्य दिखाए गए हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे “विचारणीय” हैं और उन्हें उचित तरीके से संबोधित किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी माना कि भले ही फिल्म काल्पनिक हो, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता के तर्क
याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि फिल्म में सैन्य रणनीतियों, ऑपरेशनल तरीकों और संवेदनशील स्थानों को अत्यधिक विस्तार से दिखाया गया है। इससे संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक होने का खतरा पैदा हो सकता है।
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उसने यह भी बताया कि उसने पहले ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और CBFC को इस संबंध में प्रतिनिधित्व भेजा था, और इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में भी उठाया गया है।
कोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि मंत्रालय और CBFC इसे एक प्रतिनिधित्व मानकर विचार करें और आवश्यक होने पर “सुधारात्मक कदम” उठाएं। साथ ही यह भी कहा गया कि लिए गए निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ता को दी जाए।

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