फिजूलखर्ची रोकने और संस्कृति बचाने पर जोर
बैठक के दौरान समाज के 20वें स्थापना दिवस समारोह की समीक्षा भी की गई। समाज पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार बढ़ते शादी खर्च के कारण कई परिवार कर्ज के बोझ में दब रहे हैं। गांवों में दिखावे की होड़ बढ़ी है। तेज डीजे, शराब और महंगे आयोजन अब सामाजिक चिंता का कारण बन चुके हैं। इसी वजह से समाज ने साफ संदेश दिया है कि अब पारंपरिक रीति-रिवाजों को प्राथमिकता दी जाएगी। ग्रामीणों ने बैठक में हाथ उठाकर फैसले का समर्थन किया। सामाजिक भवन के बाहर खड़े बुजुर्गों के चेहरों पर संतोष साफ दिख रहा था। कई लोग कह रहे थे कि पुराने समय की सादगी फिर लौटनी चाहिए। समाज के मुताबिक पिछले 20 वर्षों से एकरूप सामाजिक व्यवस्था लागू है और अब नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
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217 सामूहिक विवाह, लाखों रुपए की बचत
धुरवा समाज ने जानकारी दी कि अब तक 217 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है। इससे लाखों रुपए की अनावश्यक खर्ची बची। समाज का दावा है कि सामूहिक विवाह मॉडल ने गरीब परिवारों को राहत दी है और सामाजिक एकजुटता भी मजबूत हुई है। बैठक में मौजूद कई महिलाओं ने कहा कि शादी में जरूरत से ज्यादा खर्च का दबाव सबसे ज्यादा परिवार की महिलाओं पर पड़ता है। अब नए नियमों से राहत मिलने की उम्मीद है।

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