IFS Success Story , रायपुर — IFS Success Story का यह चेहरा इन दिनों पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बना हुआ है। रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव के अजय गुप्ता ने भारतीय वन सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 91वीं रैंक हासिल की है। कभी जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने और महुआ बीनने वाला यह लड़का अब उसी जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी, लेकिन सपनों की आग बुझी नहीं।
कच्चे घर से निकली मेहनत की रोशनी
संबलपुरी गांव की सुबहें आसान नहीं थीं। अजय का परिवार रोज जंगल जाता था। कभी तेंदूपत्ता तोड़ना, कभी जंगल से लकड़ी लाना, तो कभी महुआ बीनना। उन्हीं रास्तों पर चलते हुए अजय ने किताबों से रिश्ता बनाया। गांव के लोगों के मुताबिक, कई बार वह दिनभर काम करने के बाद लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करता था।
IFS परीक्षा का सफर भी आसान नहीं रहा। अजय ने 4 बार मेन्स परीक्षा दी। 3 बार इंटरव्यू तक पहुंचे। हर असफलता के बाद फिर उठे। फिर दौड़े। आखिरकार 2026 में मेहनत ने रंग दिखाया और देशभर में 91वीं रैंक हासिल कर ली। गांव में खबर पहुंची तो माहौल बदल गया। जिन पगडंडियों पर कभी संघर्ष चलता था, वहां अब जश्न की आवाज सुनाई दी। बच्चों ने मिठाई बांटी। बुजुर्गों की आंखें भर आईं। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, “हमने उसे जंगल में पत्ते तोड़ते देखा है। आज पूरा गांव उस पर गर्व कर रहा है।”
संघर्ष ने ही बनाया मजबूत
अजय की कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं है। यह उन हजारों ग्रामीण युवाओं की तस्वीर है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं। आर्थिक तंगी ने उन्हें रोका नहीं। लगातार असफलताओं ने उनका रास्ता जरूर कठिन किया, लेकिन कदम नहीं डगमगाए। करीबी लोगों का कहना है कि अजय पढ़ाई के दौरान भी गांव और जंगल से जुड़ा रहा। शायद यही वजह रही कि उसने भारतीय वन सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। जंगल उसके लिए सिर्फ पेड़ नहीं थे। वही उसका बचपन था। वही उसकी पहचान थी।

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