शराब घोटाले की जड़ तक पहुंचने की कोशिश
टीमें अलग-अलग दिशाओं में निकलीं। रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर—तीनों जगह एक साथ दस्तक। दरवाजे खुले, फाइलें खंगाली गईं, डिजिटल रिकॉर्ड स्कैन हुए। जांच मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत चल रही है।ED का फोकस साफ है—किसने पैसा कमाया, कहां छुपाया, और कैसे घुमाया।तलाशी उन लोगों के ठिकानों पर हुई जो इस कथित घोटाले से जुड़ी “अपराध की आय” को मैनेज करने में शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं—कमरों में रखी अलमारियां खुलीं, लॉकर जांचे गए, और कई जगहों पर कैश व कीमती धातु मिली। “कितना बरामद हुआ?” — यही सवाल हर किसी के मन में है। लेकिन एजेंसी ने अभी सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया।
कार्रवाई का असर: नेटवर्क में हलचल
यह छापा सिर्फ एक कार्रवाई नहीं था। यह संदेश था। जिन नामों पर शक था, अब वे जांच के घेरे में हैं। कारोबारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, और कॉर्पोरेट लिंक—सबकी भूमिका खंगाली जा रही है। एक अधिकारी ने ऑफ रिकॉर्ड कहा, “जांच अभी शुरुआती नहीं है। हम गहराई में हैं।”आप अंदाजा लगा सकते हैं—आगे और नाम सामने आ सकते हैं।

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