Sharmila Tagore’ नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में कुछ सफर इत्तेफाक से शुरू होते हैं, लेकिन इतिहास बन जाते हैं। ऐसी ही कहानी है दिग्गज अभिनेत्री Sharmila Tagore’ की। आज जब हम सिनेमा की ‘ग्रेस’ और ‘बोल्डनेस’ की बात करते हैं, तो शर्मिला का नाम सबसे ऊपर आता है। वह महज 14 साल की थीं जब महान फिल्मकार सत्यजीत रे (मानिक दा) ने उन्हें अपनी कालजयी फिल्म ‘अपुर संसार’ (1959) के लिए चुना था।
स्कूल बस से फिल्म सेट तक का सफर
शर्मिला टैगोर ने हाल ही में (मई 2026 में सत्यजीत रे की जयंती के अवसर पर) अपनी यादें ताजा करते हुए बताया कि वह फिल्म जगत से पूरी तरह अनजान थीं।
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अचानक चयन: सत्यजीत रे एक नई और मासूम चेहरे वाली लड़की की तलाश में थे। उन्होंने शर्मिला को उनके स्कूल के बाहर देखा और उनके माता-पिता से संपर्क किया।
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तनावमुक्त शुरुआत: शर्मिला बताती हैं कि मानिक दा ने सेट पर माहौल इतना आसान बना दिया था कि उन्हें कभी महसूस ही नहीं हुआ कि वह अभिनय कर रही हैं। ‘अपुर संसार’ में ‘अपर्णा’ के किरदार ने उन्हें रातों-रात बंगाली सिनेमा की पहचान बना दिया।
जब ‘बिकिनी’ पहनकर हिला दी थी पूरी इंडस्ट्री
सत्यजीत रे की ‘सादगी वाली नायिका’ ने जब बॉलीवुड का रुख किया, तो उन्होंने रूढ़ियों को तोड़कर रख दिया।
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फिल्मफेयर कवर (1966): शर्मिला टैगोर पहली भारतीय अभिनेत्री थीं जिन्होंने ‘फिल्मफेयर’ मैगजीन के कवर के लिए बिकिनी पहनी थी। उस दौर में यह इतना बड़ा विवाद बना कि संसद तक में इस पर सवाल उठाए गए।
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‘एन इवनिंग इन पेरिस’ (1967): इसके ठीक एक साल बाद फिल्म ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ में उन्होंने स्विमसूट पहनकर तहलका मचा दिया।
“जब वह फोटो शूट हुआ, तब चारों तरफ आलोचनाएं हो रही थीं। लेकिन मेरे पति (टाइगर पटौदी) ने मेरा समर्थन किया और कहा कि तुम इसमें बहुत अच्छी दिख रही हो। वह साथ मेरे लिए काफी था।” — शर्मिला टैगोर
एक वर्सटाइल करियर का निर्माण
सत्यजीत रे ने उन्हें ‘देवी’, ‘नायक’, और ‘अरण्यर दिन रात्रि’ जैसी गंभीर फिल्मों में संवारा, तो वहीं बॉलीवुड में उन्होंने ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘कश्मीर की कली’ जैसी सुपरहिट कमर्शियल फिल्में दीं।

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