Modi ‘नई दिल्ली, 29 अप्रैल 2026: वैश्विक तनाव और मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने ‘केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989’ में संशोधन के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत अब देश में E85 (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) और E100 (100% एथेनॉल) ईंधन को आधिकारिक तौर पर मान्यता देने का प्रस्ताव है।
क्या है सरकार का मेगा प्लान?
सरकार ने हाल ही में पूरे देश में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया है। अब सरकार का अगला लक्ष्य फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) वाहनों को बढ़ावा देना है।.
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आयात पर लगाम: भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। एथेनॉल के इस्तेमाल से सालाना करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
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E85 और E100 की एंट्री: ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब पेट्रोल पंपों पर सामान्य पेट्रोल के साथ-साथ E85 का विकल्प भी मिलेगा। इससे गाड़ियां लगभग पूरी तरह एथेनॉल पर चल सकेंगी।
आम जनता और पर्यावरण को क्या होगा फायदा?
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सस्ता होगा ईंधन: एथेनॉल का उत्पादन गन्ने, मक्का और अनाज से होता है, जो पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है। इससे आम आदमी की जेब पर बोझ कम होगा।
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प्रदूषण में भारी कमी: एथेनॉल एक ‘क्लीन फ्यूल’ है। पेट्रोल की तुलना में यह बहुत कम कार्बन उत्सर्जन करता है, जिससे शहरों की हवा साफ होगी।
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किसानों की चांदी: एथेनॉल की मांग बढ़ने से सीधे तौर पर गन्ना और मक्का उगाने वाले किसानों को फायदा होगा। उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की उम्मीद है।
चुनौतियां भी हैं कम नहीं!
सरकार के इस फैसले के साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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इंजन में बदलाव: मौजूदा सामान्य इंजन 85% एथेनॉल झेलने में सक्षम नहीं हैं। इसके लिए कंपनियों को फ्लेक्स-फ्यूल इंजन बनाने होंगे, जो एथेनॉल के कारण होने वाले क्षरण (Corrosion) को सह सकें।
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माइलेज पर असर: एथेनॉल की ऊर्जा घनत्व पेट्रोल से कम होती है, जिससे माइलेज में थोड़ी गिरावट आ सकती है। हालांकि, कम कीमत इसकी भरपाई कर सकती है।
कब से लागू होगा नियम?
सरकार ने फिलहाल ड्राफ्ट जारी कर 30 दिनों के भीतर जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पहले ही कह चुके हैं कि “वह दिन दूर नहीं जब भारत का किसान अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जादाता भी बनेगा।” यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले 1-2 वर्षों में सड़कों पर 85% एथेनॉल वाली गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी।

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