कोर्टरूम में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह विधेयक संविधान के कुछ अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है। मामला संवेदनशील था। बहस लंबी चली। राज्य की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने स्पष्ट रुख रखा—याचिका ग्राह्य ही नहीं है। उन्होंने कोर्ट से इसे खारिज करने का अनुरोध किया।
कानूनी नजरिया: ग्राह्यता ही बनी निर्णायक
इस केस में सबसे अहम बिंदु रहा—क्या याचिका सुनवाई योग्य है? कोर्ट ने इसी पर फैसला लिया। जब किसी याचिका की ग्राह्यता पर सवाल खड़ा होता है, तो मामला आगे बढ़ने से पहले ही खत्म हो सकता है। यहां भी वही हुआ।
जमीनी असर: राजनीति और समाज दोनों पर नजर
यह फैसला सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर राजनीतिक बहस और सामाजिक विमर्श पर भी पड़ेगा। कोर्ट परिसर के बाहर माहौल शांत था, लेकिन चर्चा तेज। हर कोई फैसले के मायने समझने की कोशिश में।

More Stories
IFS अधिकारियों का बड़ा तबादला’ 7 भारतीय वन सेवा अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी, संजीता गुप्ता बनीं राज्य लघु वनोपज संघ की प्रभारी प्रबंध संचालक
CG Cyber Alert : सावधान’ मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह के नाम से बनी फर्जी फेसबुक आईडी, परिचितों से मांगे जा रहे पैसे
रायपुर में पोस्टर लगाने के नए नियम लागू’ अब तय जगह पर ही लगेगा पोस्टर, दूसरी जगह चिपकाया तो देना होगा ₹5,000 जुर्माना