गांव बना अदालत, भीड़ ने सुनाई सजा
बताया जा रहा है कि घटना उस समय हुई जब ग्रामीणों को युवक पर बिजली तार चोरी का शक हुआ। बात बहस से शुरू हुई, लेकिन जल्द ही माहौल गरमा गया। कुछ लोगों ने युवक को पकड़ लिया। फिर जो हुआ, उसने रोंगटे खड़े कर दिए। सिर के बाल आधे मुंडवा दिए गए। गले में चप्पलों की माला। और फिर—गांव की गलियों में घुमाया गया। यह सब खुलेआम हुआ, दिनदहाड़े। स्थिति यहीं नहीं रुकी। युवक की पत्नी को भी साथ में घसीटा गया और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। गांव की सड़कों पर भीड़ जमा रही। कुछ लोग वीडियो बनाते दिखे—तनाव हवा में साफ महसूस हो रहा था।
कानून पर सवाल, प्रशासन पर दबाव
इस तरह की घटनाएं सीधे कानून व्यवस्था को चुनौती देती हैं। भारत में किसी भी अपराध की जांच और सजा देने का अधिकार केवल न्याय प्रणाली के पास है। भीड़ द्वारा सजा देना गैरकानूनी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पुलिस को मामले की जानकारी दी गई है। हालांकि, इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
मानवता का चेहरा और डर का साया
ऐसे मामलों में सिर्फ कानून नहीं टूटता—इंसानियत भी हारती है। एक पल के शक ने पूरे परिवार को शर्म और डर में धकेल दिया। गांव के एक बुजुर्ग ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “गुस्सा था, पर इतना नहीं होना चाहिए था। मामला हाथ से निकल गया।”

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