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April 21, 2026

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Rohini Nakshatra 2026

Rohini Nakshatra 2026

Rohini Nakshatra 2026 : 25 मई से 2 जून तक ‘नौतपा’ का पहरा , रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के आते ही लू और गर्मी तोड़ेंगे सारे रिकॉर्ड

“सूर्य का रोहिणी में वास”: 9 दिनों का धार्मिक गणित

हमें पता चला कि सूर्य देव 25 मई को दोपहर करीब 2:48 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. यह नक्षत्र चंद्रमा का है, और जब सूर्य इसमें आते हैं, तो वे अपनी पूरी शक्ति से चमकते हैं. शास्त्रों के अनुसार, इन 9 दिनों में सूर्य देव की विशेष उपासना का महत्व है. यदि नौतपा के सभी 9 दिन पूर्ण रूप से तपते हैं, तो यह अच्छे मानसून (Monsoon) का संकेत माना जाता है. इसका अर्थ है कि आगे आने वाले समय में अच्छी वर्षा होगी, जो कृषि के लिए प्लेऑफ में जीत जैसी महत्वपूर्ण है |

इन 9 दिनों के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा में जल दान, छायादार वृक्ष लगाना और ब्राह्मणों को शीतल वस्तुओं का दान करना चाहिए. इस बार के नौतपा में, गर्मी इतनी प्रचंड होने की संभावना है कि प्रशासन ने भी अलर्ट जारी किया है. दिल्ली और आसपास के इलाकों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस को छू सकता है |

“क्या करें, क्या नहीं”: नौतपा की चेकलिस्ट

भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए, सिर्फ़ धार्मिक ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कदम उठाना भी आवश्यक है. दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचें. यदि निकलना ज़रूरी हो, तो सिर और मुंह को सूती कपड़े से ढककर रखें. ज़्यादा से ज़्यादा पानी और तरल पदार्थों (नींबू पानी, छाछ) का सेवन करें. ताज़ा और सुपाच्य भोजन ही करें. इन दिनों में कुछ चीज़ें सिर्फ़ आपके स्वास्थ्य को नहीं, बल्कि आपकी धार्मिक मान्यताओं को भी नुक़सान पहुंचा सकती हैं. नौतपा के दौरान मांगलिक कार्यों (जैसे विवाह, मुंडन) को टालना चाहिए. बासी भोजन और नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें. दिन में सिर्फ़ दो बार स्नान करें, और यात्रा करने से बचें. शास्त्रों में कहा गया है कि नौतपा में जितना संभव हो, शांत रहें और सूर्य देव के ‘ओम घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें |

“नौतपा सिर्फ़ एक अंधविश्वास नहीं, बल्कि सूर्य की स्थिति पर आधारित एक खगोलीय घटना है. इस बार सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में पूर्ण बल के साथ प्रवेश कर रहे हैं, जिसका अर्थ है कि गर्मी प्रचंड होगी. भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह और शाम के समय ही मंदिर जाएं और जल दान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. यह समय आत्म-संयम और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का है.”
— पंडित के.के. शास्त्री, ज्योतिषाचार्य

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