बिलासपुर: चश्मा बनाने वाली प्रमुख कंपनी ‘लेंसकार्ट’ (Lenskart) के कथित ड्रेस कोड गाइडलाइन को लेकर देश भर में जारी विवाद अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गया है। सोमवार को बिलासपुर में विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने शहर के कई लेंसकार्ट स्टोर्स पर पहुंचकर अपना विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी की कथित भेदभावपूर्ण नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और स्टोर्स पर काम कर रहे कर्मचारियों को ‘तिलक’ लगाकर और ‘कलावा’ बांधकर अपना संदेश दिया।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत एक आंतरिक ‘ग्रूमिंग और ड्रेस कोड’ गाइडलाइन के वायरल होने से हुई। सोशल मीडिया पर वायरल इस दस्तावेज़ में दावा किया गया था कि लेंसकार्ट के स्टोर्स में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए तिलक, बिंदी और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई गई थी। वहीं, कथित तौर पर हिजाब और पगड़ी जैसी पोशाकों को अनुमति देने के प्रावधानों ने विवाद को और हवा दे दी।
इस मुद्दे ने देश भर में ‘धार्मिक भेदभाव’ और ‘कॉर्पोरेट नीतियों’ को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है, जिसके चलते कई शहरों में कंपनी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और बॉयकॉट की मांग उठ रही है।
बिलासपुर में प्रदर्शनकारियों की नाराजगी
बिलासपुर में बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने कंपनी के स्टोर्स के बाहर प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के तौर पर लेंसकार्ट को अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए, न कि भारतीय प्रतीकों को प्रतिबंधित करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि किसी भी सूरत में वे अपने धार्मिक प्रतीकों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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प्रदर्शन का तरीका: कार्यकर्ताओं ने स्टोर्स में मौजूद कर्मचारियों से संवाद किया और उन्हें तिलक लगाकर यह जताने की कोशिश की कि इन धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध अनुचित है।
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मांग: प्रदर्शनकारियों ने लेंसकार्ट प्रबंधन से अपनी नीतियों में बदलाव करने और भविष्य में ऐसी किसी भी ‘भेदभावपूर्ण’ गाइडलाइन को जारी न करने की चेतावनी दी है।

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