एक पगड़ी, दो रिकॉर्ड: सम्राट की ऐतिहासिक शपथ
शपथ लेने के तुरंत बाद, सम्राट चौधरी के नाम के साथ दो ऐसे रिकॉर्ड जुड़ गए जो दशकों से अछूते थे। पहला और सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड यह है कि वह बिहार के पहले मुख्यमंत्री हैं जो कुशवाहा समुदाय (कोइरी) से आते हैं। यह एक बहुत बड़ा सामाजिक-राजनैतिक बदलाव है, जिसने बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को एक नया आयाम दिया है। इससे पहले, ओबीसी और दलित समुदायों से मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन कुशवाहा समुदाय से कोई भी इस पद तक नहीं पहुँचा था।
दूसरा रिकॉर्ड उनके परिवार से जुड़ा है। वह बिहार के दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनके पिता भी बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। सम्राट चौधरी के पिता, स्वर्गीय शकुनि चौधरी, बिहार के मुख्यमंत्री थे। इससे पहले यह रिकॉर्ड केवल स्वर्गीय लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के पास था, क्योंकि दोनों ही मुख्यमंत्री रह चुके थे। लेकिन, पिता-पुत्र की जोड़ी मुख्यमंत्री बनने का यह रिकॉर्ड 59 साल बाद बना है, जब स्वर्गीय भोला पासवान शास्त्री (जो मुख्यमंत्री थे) के बेटे, डॉ. के.एन. शास्त्री, मुख्यमंत्री बने थे (हालाँकि भोला पासवान शास्त्री ने अपने बेटे को राजनीति में बढ़ावा नहीं दिया था)। शकुनि चौधरी और सम्राट चौधरी की जोड़ी बिहार की राजनीति में एक शक्तिशाली परिवार का प्रतीक बन गई है, जिसने दशकों तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
“आज एक ऐतिहासिक दिन है, न केवल मेरे लिए, बल्कि पूरे बिहार के लिए। यह पगड़ी, जो मैंने अपने पिता की याद में बांधी है, अब बिहार की जनता के मान-सम्मान की पगड़ी है। मेरा संकल्प है कि बिहार को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाऊँ, भ्रष्टाचार का खात्मा करूँ और हर बिहारी को गर्व महसूस कराऊँ। यह एक नई शुरुआत है।”
— सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में एक नए राजनैतिक गठबंधन की जीत का प्रतीक है। बीजेपी ने उन्हें अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया था, और उन्होंने जेडीयू (नीतीश कुमार) और अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर ‘एनडीए’ (नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस) का गठन किया। इस गठबंधन ने हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (जिसमें आरजेडी, कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल थे) को हरा दिया। चौधरी की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी ने बीजेपी को बिहार में एक नया चेहरा और एक नया नेता प्रदान किया है, जो आने वाले समय में पार्टी की रणनीति को आकार देगा। अब, सबकी नजरें सम्राट चौधरी की कैबिनेट और उनकी नीतियों पर टिकी हैं, क्योंकि बिहार को एक स्थिर और विकासोन्मुखी सरकार की जरूरत है।

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