तेहरान/न्यूयॉर्क | 14 अप्रैल 2026 मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव एक नए और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए भीषण हमलों के बाद, अब ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जवाबी कानूनी मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में पांच खाड़ी देशों से भारी-भरकम युद्ध हर्जाने की मांग की है।
ईरान का गंभीर आरोप: “पड़ोसियों ने पीठ में छुरा घोंपा”
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को लिखे पत्र में दावा किया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कतर और जॉर्डन ने अपने हवाई क्षेत्र और सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए करने दिया।
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ईरान के दावे:
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क्षेत्रीय उल्लंघन: इन 5 देशों ने अपनी जमीन और आसमान को अमेरिकी और इजरायली लड़ाकू विमानों के लिए खोलकर अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन किया है।
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हर्जाने की मांग: ईरान ने अपनी बुनियादी संरचना, सैन्य ठिकानों और नागरिक संपत्तियों को हुए नुकसान के बदले करीब 25 ट्रिलियन डॉलर (खरबों में) के मुआवजे की मांग की है।
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सीधा हमला: ईरान ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में इन पड़ोसी देशों की सेनाओं ने भी सीधे तौर पर ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया।
युद्ध की विभीषिका: 40 दिनों का ‘नरक’
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) और इजरायल (ऑपरेशन रोरिंग लायन) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाकर बड़े हमले शुरू किए थे।
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नुकसान: 40 दिनों तक चले इस युद्ध में ईरान के 60% बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर तबाह हो गए और नेतृत्व को भारी चोट पहुंची।
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सीजफायर: 8 अप्रैल 2026 को एक अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) प्रभावी हुआ, जिसके बाद अब ईरान ने हुए नुकसान की भरपाई के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की है।
खाड़ी देशों और अमेरिका का रुख
जहां ईरान इन देशों को दोषी ठहरा रहा है, वहीं अमेरिका और इजरायल का कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा (Self-defense) में ये कदम उठाए। दूसरी ओर, खाड़ी देशों ने पहले ही तटस्थ रहने की बात कही थी, लेकिन ईरान का दावा है कि हकीकत इसके उलट है।

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