नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता के प्राकट्य उत्सव यानी ‘सीता नवमी’ के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 25 अप्रैल, शनिवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सीता राजा जनक को हल जोतते समय भूमि से प्राप्त हुई थीं। यह तिथि विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है, जो अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करती हैं। उदय तिथि की गणना के आधार पर 25 अप्रैल को देशभर में माता जानकी की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी।
सीता नवमी व्रत के अद्भुत लाभ
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सीता नवमी व्रत के लाभ बहुआयामी हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भी विवाहित महिला इस दिन विधि-विधान से माता सीता और भगवान राम की पूजा करती है, उसे देवी पार्वती जैसा सौभाग्य प्राप्त होता है।
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अखंड सौभाग्य: इस व्रत को करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है और वैवाहिक जीवन के क्लेश दूर होते हैं।
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दुखों का निवारण: माता सीता को धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति माना जाता है। उनकी पूजा से मानसिक शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
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तीर्थ दर्शन के समान पुण्य: मान्यता है कि सीता नवमी का व्रत करने से कई बड़े यज्ञों और तीर्थ यात्राओं के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
शुभ मुहूर्त और तिथि का समय
वैशाख माह की नवमी तिथि का गणितीय समय इस वर्ष काफी महत्वपूर्ण है। सीता नवमी व्रत के लाभ प्राप्त करने के लिए शुभ मुहूर्त में पूजा करना श्रेयस्कर माना जाता है:
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नवमी तिथि का आरंभ: 24 अप्रैल 2026 को शाम 07:21 बजे से।
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नवमी तिथि का समापन: 25 अप्रैल 2026 को शाम 06:27 बजे तक।
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उदया तिथि: उदया तिथि 25 अप्रैल को होने के कारण इसी दिन व्रत और पूजन किया जाएगा।
पूजा विधि और परंपरा
सीता नवमी के दिन सुबह जल्दी स्नान के बाद ‘मम जानकी जन्मोत्सव व्रत’ का संकल्प लिया जाता है। इस दिन भगवान राम और माता सीता की संयुक्त रूप से पूजा की जाती है। पूजा में पीले फूल, पीले वस्त्र और सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करने का विशेष महत्व है। इस दिन दान-पुण्य करने से घर में बरकत आती है।
धार्मिक महत्व
शास्त्रों में माता सीता को साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। वैशाख के महीने में आने वाली इस नवमी का महत्व राम नवमी के समान ही फलदायी बताया गया है। सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखकर माता सीता के गुणों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेती हैं।

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