बिना अनुमति सूची जारी, मची खलबली
यह पूरी घटना आज सुबह की है। रायपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने काफी इंतजार के बाद शहर के 70 वार्ड अध्यक्षों के नामों की घोषणा की थी। यह सूची जैसे ही सार्वजनिक हुई, पार्टी के भीतर ही इसका विरोध शुरू हो गया। लेकिन सबसे बड़ा झटका तब लगा जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने इस सूची को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार देते हुए इसे खारिज कर दिया।
पीसीसी के आदेश में साफ़ कहा गया है कि इतनी बड़ी नियुक्तियां करने से पहले प्रदेश नेतृत्व को विश्वास में नहीं लिया गया था। यह सीधे तौर पर अनुशासनहीनता का मामला है। इस फैसले ने रायपुर कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच एक अजीब सी बेचैनी है।
इस्तीफे का दौर: कार्यकर्ताओं का बढ़ा आक्रोश
सूची निरस्त होने के ठीक बाद, रायपुर कांग्रेस में इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों को वार्ड अध्यक्ष बनाया गया था, उन्होंने और उनके समर्थकों ने इस अपमान के खिलाफ अपना इस्तीफा देना शुरू कर दिया है। शहर कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी इस फैसले से आहत हैं।
पार्टी के भीतर इस संकट को लेकर गहमागहमी का माहौल है। कुछ नेता इसे एक गुट के खिलाफ दूसरे गुट की चाल बता रहे हैं, तो कुछ इसे संगठन की कमजोरी। लेकिन एक बात साफ है कि इस फैसले ने रायपुर कांग्रेस को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।
“यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। हमने इतनी मेहनत से सूची तैयार की थी और इसे बिना किसी चर्चा के रद्द कर दिया गया। यह पार्टी के लिए अच्छा नहीं है। हम अपने नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे।” — शहर कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी

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