Vaishakh 2026 : नई दिल्ली/रायपुर | 3 अप्रैल 2026 से इस पवित्र महीने की शुरुआत हो चुकी है। शास्त्रों के अनुसार, वैशाख का महीना भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इस दौरान की गई भक्ति का अक्षय फल प्राप्त होता है। विशेष रूप से इस महीने में तुलसी पूजन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन अक्सर अनजाने में लोग कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे घर की बरकत रुक सकती है।
वैशाख में तुलसी पूजन का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख के महीने में सूर्य की तपिश बढ़ने लगती है, इसलिए इस दौरान तुलसी माता की सेवा करने से साधक को शीतलता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। कहा जाता है कि वैशाख में तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना और उनकी सेवा करना सीधे भगवान श्रीहरि की सेवा करने के समान है।
जल देते समय न करें ये ‘बड़ी चूक’
ज्योतिषाचार्यों और शास्त्र विशेषज्ञों के अनुसार, तुलसी में जल देते समय इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:
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बिना स्नान किए जल देना: कई लोग बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में तुलसी को जल चढ़ा देते हैं, जो वर्जित माना गया है। हमेशा स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करके ही जल अर्पित करें।
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रविवार और एकादशी का ध्यान: वैशाख के महीने में भी रविवार और एकादशी तिथि को तुलसी में जल नहीं चढ़ाना चाहिए। माना जाता है कि इन दिनों माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
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अत्यधिक जल अर्पित करना: वैशाख में गर्मी के कारण लोग बार-बार जल डालते हैं, जिससे जड़ें सड़ने लगती हैं। शास्त्रों में इसे भी दोष माना गया है। पौधे की सुरक्षा का ध्यान रखना भी सेवा का हिस्सा है।
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बाल खुले रखकर पूजन: महिलाओं को हमेशा अपने बाल बांधकर और सिर ढककर ही तुलसी माता की पूजा और जल अर्पण करना चाहिए।
बरकत के लिए करें ये विशेष उपाय
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तुलसी के पास दीपक: वैशाख के पूरे महीने शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जरूर जलाएं। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
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कलश से जल: जल चढ़ाते समय तांबे के लोटे का उपयोग करना श्रेष्ठ माना गया है।
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परिक्रमा का महत्व: जल देने के बाद तुलसी के पौधे की कम से कम तीन बार परिक्रमा जरूर करें।

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