बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर) ने पूर्व मुख्यमंत्री Amit Jogi के बेटे और जेसीसीजे (JCCJ) नेता अमित जोगी के खिलाफ सख्त आदेश जारी किया है। कोर्ट ने अमित जोगी को 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। यह फैसला सीबीआई (CBI) द्वारा अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान आया है।
क्या है पूरा मामला?
जून 2003 में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 आरोपी थे, जिनमें से 28 को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाई कोर्ट में इस मामले की नए सिरे से सुनवाई शुरू हुई है।
अमित जोगी ने उठाए सवाल: “बिना सुनवाई के लिया फैसला”
हाई कोर्ट के इस आदेश पर अमित जोगी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया और मीडिया बयानों में कहा:
“आज उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया—वह भी बिना मुझे सुनवाई का एक भी अवसर दिए। मुझे अपनी बात रखने का मौका तक नहीं मिला।”
अमित जोगी ने आगे कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्प तलाशेंगे और उन्हें सत्य की जीत पर पूरा भरोसा है।
राजनीतिक हलकों में मची खलबली
चुनावी समीकरणों और राज्य की राजनीति के लिहाज से यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जग्गी परिवार के सदस्य सतीश जग्गी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे “न्याय की दिशा में बढ़ा हुआ कदम” बताया है।

More Stories
Chhattisgarh News : पुलिस की बड़ी रेड , गुमशुदा युवती को ढूंढने गई थी पुलिस, संदिग्ध मकान से 3 युवतियां और युवक हिरासत में
Court Campus Fight : न्यायालय परिसर बना जंग का मैदान , दो पक्षों में जमकर हुई मारपीट, एक-दूसरे पर लोहे की रॉड से किया हमला
Raipur 20 May 2026 DSR: 24 घंटों में 25 गंभीर मामले दर्ज; अपहरण, सड़क दुर्घटनाएं और आबकारी एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई