Global oil market news नई दिल्ली/मॉस्को: रूस ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा कदम उठाते हुए 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक पेट्रोल निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है। यह निर्णय देश के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक की समीक्षा बैठक के बाद लिया गया है। सरकार का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रित रखना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को इस प्रस्ताव को तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट में इजराइल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल और पेट्रोलियम बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसके चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
रूस रोजाना करीब 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल का निर्यात करता है, ऐसे में इस फैसले का अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
किन देशों पर पड़ेगा असर?
रूस के इस फैसले से कई बड़े आयातक देशों पर सीधा असर पड़ सकता है, जिनमें शामिल हैं:
- चीन
- तुर्किये
- ब्राजील
- अफ्रीकी देश
- सिंगापुर
ये देश रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदार हैं, इसलिए सप्लाई में कमी से इन देशों में कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत पर इस फैसले का सीधा असर बेहद सीमित रहेगा। इसकी वजह यह है कि भारत पेट्रोल जैसे तैयार ईंधन के बजाय कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) आयात करता है।
- भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल आयात करता है
- इसमें से करीब 20% रूस से आता है
- देश में मजबूत रिफाइनरी नेटवर्क है, जो कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल-डीजल बनाता है
भारत रोजाना लगभग 56 लाख बैरल कच्चे तेल का रिफाइनिंग करता है, जिससे न केवल घरेलू जरूरतें पूरी होती हैं, बल्कि तैयार ईंधन का निर्यात भी किया जाता है।
फिर भी क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें?
हालांकि भारत पर सीधा असर कम है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस के फैसले से वैश्विक सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
पहले से ही मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पहले भी लग चुका है बैन
यह पहला मौका नहीं है जब रूस ने पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाई हो।
- पिछले साल भी रूस ने ऐसा कदम उठाया था
- तब यूक्रेन हमलों के कारण रिफाइनरियों पर असर पड़ा था
- कीमत नियंत्रण और घरेलू सप्लाई बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया था
बाजार पर नजर
मॉस्को में हुई बैठक में यह भी साफ किया गया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के पक्ष में हैं। तेल कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।

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