नई दिल्ली: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) ने घरेलू उड़ानों के किराए पर लगी ऊपरी सीमा (Price Cap) को हटाने का बड़ा फैसला लिया है। आदेश के मुताबिक, यह बदलाव 23 मार्च से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा।
इंडिगो संकट के बाद लगाई गई थी पाबंदी
बता दें कि इंडिगो एयरलाइंस के हालिया तकनीकी और परिचालन संकट के दौरान यात्रियों से मनमाना किराया वसूले जाने की शिकायतें आई थीं। उस समय सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए अधिकतम किराए की सीमा ₹18,000 तय कर दी थी। सरकार का उद्देश्य यात्रियों को आपात स्थिति में एयरलाइंस की ‘डायनामिक प्राइसिंग’ (मांग बढ़ने पर दाम बढ़ाना) से बचाना था।
अब क्या बदलेगा?
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मांग और आपूर्ति का खेल: 23 मार्च से एयरलाइन कंपनियां सीटों की डिमांड के हिसाब से किराया वसूल सकेंगी। यानी त्योहारों, छुट्टियों या आखिरी वक्त (Last Minute) की बुकिंग पर किराया काफी ऊपर जा सकता है।
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एयरलाइंस को राहत: विमानन कंपनियां लंबे समय से इस पाबंदी को हटाने की मांग कर रही थीं ताकि वे अपने घाटे की भरपाई कर सकें और परिचालन लागत (Fuel Cost) के अनुसार कीमतें तय कर सकें।
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यात्रियों के लिए चुनौती: अब यात्रियों को सस्ता टिकट पाने के लिए काफी पहले बुकिंग करानी होगी, क्योंकि सफर की तारीख नजदीक आने पर कीमतें पहले की तुलना में कहीं अधिक हो सकती हैं।
मंत्रालय का तर्क: बाजार की स्थिति अब स्थिर
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार:
“इंडिगो संकट के दौरान यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए अस्थाई रोक लगाई गई थी। अब बाजार की स्थिति और उड़ानों की उपलब्धता सामान्य हो गई है, इसलिए किराए को फिर से बाजार के हवाले (Deregulated) करने का निर्णय लिया गया है।”

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