- मुख्य देवी: नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की साधना के लिए समर्पित है।
- विशेष फल: आज की पूजा से कठिन समय में धैर्य बनाए रखने और विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है।
- शुभ रंग: मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक है।
Chaitra Navratri 2026 Day 2 , नई दिल्ली — चैत्र नवरात्रि 2026 के दूसरे दिन आज श्रद्धालु मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की उपासना कर रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार, ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली है। यानी तप का आचरण करने वाली देवी। आज की पूजा उन भक्तों के लिए विशेष है जो अपने जीवन में अनुशासन और मानसिक मजबूती चाहते हैं।
पूजा विधि और मंत्रों का प्रभाव
मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल है। आज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद मां को श्वेत वस्त्र और फूल अर्पित करने चाहिए। शक्कर या सफेद मिठाई का भोग लगाना आज के दिन विशेष महत्व रखता है।
- मंत्र: “या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
- प्रिय भोग: चीनी, मिश्री या दूध से बनी सफेद मिठाई।
- महत्व: मंगल दोष की शांति के लिए भी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अचूक मानी जाती है।
भक्त आज विशेष रूप से ब्रह्मचारिणी चालीसा का पाठ करते हैं। मान्यता है कि जो भक्त आज पूरी श्रद्धा से चालीसा पढ़ते हैं, उनके घर में कलह समाप्त होती है और सुख-शांति का स्थायी वास होता है। मां की कृपा से मनुष्य के तप, त्याग और वैराग्य में वृद्धि होती है।
“मां ब्रह्मचारिणी की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति को मजबूत करने का विज्ञान है। हजारों वर्षों की कठिन तपस्या के बाद मां ने यह स्वरूप प्राप्त किया था, जो हमें सिखाता है कि बिना विचलित हुए अपने लक्ष्य की ओर कैसे बढ़ें।”
— आचार्य पंडित कौशल, आध्यात्मिक विशेषज्ञ

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