Chhattisgarh Elephant Conservation Failure , रायगढ़ — छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घरघोड़ा रेंज में वन्यजीव संरक्षण की सुरक्षा दीवार ढह गई है। कुरकुट नदी के पानी में दो हाथी शावकों के शव मिलने से हड़कंप मच गया। शुरुआती जांच के मुताबिक, शावकों की मौत करीब 3 से 4 दिन पहले हुई थी। कई दिनों तक वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, जो सीधे तौर पर ग्राउंड मॉनिटरिंग की विफलता को दर्शाता है।
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मैदान पर चूक: 4 दिन तक क्यों सोता रहा वन विभाग?
हाथी शावकों के शवों का मिलना वन विभाग की ‘डिफेंसिव लाइन’ में बड़ी सेंध है। जब हाथियों की आवाजाही को ट्रैक करने के लिए भारी निवेश किया जा रहा है, तब 3-4 दिनों तक शवों का सड़ना सिस्टम की सुस्ती उजागर करता है। छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य गोपाल अग्रवाल ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने इसे विभाग की घोर लापरवाही करार दिया है। अग्रवाल का कहना है कि अगर निगरानी टीम फील्ड पर एक्टिव होती, तो यह मामला बहुत पहले सामने आ जाता। अब इस मामले की रिपोर्ट दिल्ली भेजी जा रही है ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
“यह साधारण घटना नहीं है। दो शावकों की मौत और विभाग को खबर तक न होना गंभीर लापरवाही है। हम इस मामले को दिल्ली में उठाएंगे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।”
— गोपाल अग्रवाल, सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड
रायगढ़ और आसपास के इलाकों में मानव-हाथी संघर्ष का स्कोरकार्ड पहले से ही बिगड़ा हुआ है। शावकों की मौत न केवल जैव-विविधता के लिए नुकसान है, बल्कि यह भविष्य के लिए भी खतरनाक है। हाथियों का झुंड अपने साथियों की मौत के बाद अक्सर आक्रामक हो जाता है, जिससे स्थानीय गांवों पर हमले का खतरा बढ़ सकता है। अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। यदि दिल्ली से उच्च स्तरीय टीम जांच के लिए आती है, तो घरघोड़ा रेंज के अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिरना तय है। आने वाले हफ्तों में छत्तीसगढ़ वन विभाग को अपने ‘ट्रैकिंग प्रोटोकॉल’ को पूरी तरह से रीबूट करना होगा।

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