क्यों निशाने पर आया भारत? ‘एक्सेस कैपेसिटी’ बनी वजह
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, भारत उन देशों की सूची में शामिल है जहां उत्पादन क्षमता घरेलू मांग से कहीं अधिक है। अमेरिका का आरोप है कि भारत ऑटोमोबाइल, स्टील, पेट्रोकेमिकल्स और सोलर मॉड्यूल जैसे क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर रहा है। यूएसटीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 में भारत का अमेरिका के साथ 58 अरब डॉलर (लगभग ₹4.8 लाख करोड़) का व्यापार अधिशेष (Surplus) रहा, जो अमेरिकी उद्योगों के लिए चुनौती है।
क्या है ‘सेक्शन 301’ और कैसे पड़ेगा भारत पर असर?
सेक्शन 301 अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 का एक शक्तिशाली हथियार है। इसके तहत अमेरिका किसी भी देश की उन नीतियों की जांच कर सकता है जो अमेरिकी वाणिज्य को अनुचित तरीके से बाधित करती हैं। अगर जांच में भारत की नीतियां ‘भेदभावपूर्ण’ पाई जाती हैं, तो अमेरिका भारतीय सामानों पर भारी इंपोर्ट ड्यूटी लगा सकता है।
- समय सीमा: सार्वजनिक सुझाव 15 अप्रैल तक मांगे गए हैं।
- सुनवाई: 5 मई 2026 को इस मामले पर बड़ी सुनवाई होगी।
- नया टैरिफ: संभावना है कि इस साल जुलाई या अगस्त तक नए टैक्स लागू हो जाएं।
“अमेरिका अब उन देशों के लिए अपनी औद्योगिक नींव की बलि नहीं देगा जो अपनी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की समस्याओं को हमें निर्यात कर रहे हैं। हम अपनी विनिर्माण शक्ति और नौकरियों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।”
— जेमिसन ग्रीर, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR)
इस जांच का सीधा असर भारत के टेक्सटाइल, फार्मा (हेल्थ), और ऑटो पार्ट्स सेक्टर पर पड़ सकता है। यदि ट्रंप प्रशासन टैरिफ बढ़ाता है, तो अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात महंगा हो जाएगा। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय फिलहाल इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जानकारों का मानना है कि यह जांच ईरान-इजरायल युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक आर्थिक दबाव और अमेरिका में होने वाले आगामी मिड-टर्म चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक रूप से भी अहम है।

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